कछवां। क्षेत्र के जलालपुर गांव में मंगलवार की रात नहर का तटबंध टूटने के बावजूद बुधवार को कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। जिसे लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। चंद्रप्रभा नहर का पानी जहां लोगों के घरों में घूस गया वहीं पांच दर्जन से अधिक किसानों के खेतों में लगे फसल जलमग्न हो गए। घरों में पानी घुसने से हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने लकड़ी का तख्त, मिट्टी भरी बोरी लगा किसी तरह नहर को बांध पानी रोकने का प्रयास किया पर वे नाकामयाब रहे।
पानी में डूबे फसल देख किसान चिंतित हो उठे। बताते हैं कि चंद्रप्रभा नहर मिर्जामुराद से मितई गांव तक निकली है। रविवार की रात पूर्व माध्यमिक विद्यालय के निकट नहर पुलिया के पास स्थित गेदुरसिंह के टमाटर लगे खेत से सटा नहर का तटबंध टूट गया। नहर टूटने से इंद्रदेव राम, कल्लू राम, अनवर, वारीस, छंनू, फारुक समेत पांच दर्जन से अधिक किसानों के खेत में लगा गेंहू, मटर, सरसो, चना, गोभी, आलू लगे सत्तर बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो गए। कई ग्रामीणों के घरों में भी पानी घुस गया। पानी का बहाव बस्ती की ओर होने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान मीरा यादव की सूचना पर दुसरे दिन नहर का पानी बंद किया गया। किसानों का कहना है कि क्षमता से अधिक पानी छोड़ने के कारण नहर का तटबंध टूटा। नहर टूटने के वावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी के मौके पर न आने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने बर्बाद हुई फसल के मुआवजे की मांग की है।