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जन सूचना अधिकारी का पहला काम सूचना देना: जावेद उस्मानी

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प्रशिक्षण को संबोधित करते जावेद उस्मानी
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मिर्जापुर। जन सूचना अधिकार अधिनियम से जनता को सुशासन मिलेगा और कार्यों में पारदर्शिता आएगी। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। जन सूचना अधिकारी का पहला काम सूचना देना है। वह किसी को भी सूचना देने से मना नहीं कर सकता है। वह सिर्फ विधिक आधार पर ही सूचना देने से मना कर सकता है। ये बातें मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने मंडलायुक्त कार्यालय परिसर में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में जन सूचना अधिकार अधिनियम का गठन एक क्रांतिकारी कदम था। जन सूचना अधिनियम से भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगा है। अधिनियम के बेहतर क्रियान्वयन से सुशासन को बल मिलेगा। जन सूचना अधिकार अधिनियम को प्रभावी बनाया जा रहा है। इसके लिए जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ताकि आयोग व जनसूचना अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित हो सके। प्रदेश स्तर पर चार मास्टर ट्रेनर बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सूचना नहीं देने पर संबंधित पर अधिकतम 25 हजार का जुर्माना लगाया जाता है। इसके बाद भी सूचना नहीं देने पर संबंधित के उच्चाधिकारियों को विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि पहले चरण का प्रशिक्षण मार्च 2017 तक सभी मंडलों में दिया जा चुका है। इसके बाद दूसरे चरण में विंध्याचल मंडल में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण एक सतत प्रक्रिया है क्योंकि जन सूचना अधिकारी प्राय: बदलते रहते हैं। इसके लिए नियमित मंडलवार नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम दिया जाता है। इस दौरान अपर आयुक्त सूर्यमणि, जिलाधिकारी अनुराग पटेल, नगर मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा, एसडीएम सदर अरविंद चौहान, सूचना अधिकारी ओम प्रकाश उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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