जिले के परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए कायाकल्प योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 19 पैरामीटर पर विद्यालयों में व्याप्त कर्मियों में सुधार किया जा रहा है। इस योजना के तहत लाखों रुपये खर्च के बाद भी जिले के 558 परिषदीय विद्यालय अब भी चहारदीवारी विहीन हैं। परिषदीय विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
कायाकल्प योजना के तहत जिले के परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाना है। इसके लिए दिव्यांग शौचालय और चहारदीवारी का भी निर्माण कराना है, लेकिन कई विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण नहीं किया गया है। फिलहाल जिले में 1800 सौ से परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। कायाकल्प योजना के तहत जिले के सभी 12 विकास खंडों के विद्यालयों में कार्य होने हैं। अधिकांश कार्य जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय के माध्यम से होने हैं। चहारदीवारी नहीं होने से छुट्टा पशु विद्यालयों में घुस जा रहे हैं और नुकसान कर रहे हैं। रात में ग्रामीण क्षेत्र के सुदूर विद्यालयों में अराजक तत्वों का भी जमावड़ा होता है। कई जगहों पर तो लोग अपने मवेशी भी बांध देते हैं। इससे सुबह विद्यालय पहुंचने पर अध्यापकों समेत विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कायाकल्प योजना के तहत 19 बिंदुओं पर काम होना है। जिले के मात्र 156 परिषदीय विद्यालय इस योजना के तहत अब तक संतृप्त हो पाए हैं। सिटी विकास खंड का कंपोजिट विद्यालय रानी कर्णावती व पहाड़ी विकास खंड का प्राथमिक विद्यालय भगेसर संतृप्त विद्यालयों की सूची में शामिल हैं। इसके साथ ही 14 बिंदुओं पर जिले के 1777 विद्यालय संतृप्त हो गए हैं, लेकिन अन्य पांच बिंदुओं पर काम होना शेष है। जिन विद्यालयों में सभी 19 बिंदुओं पर कार्य हुए हैं। उनको माडल स्कूल के रूप में भी चिह्नित किया गया है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए भी काम किया जा रहा है। बीएसए गौतम प्रसाद का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार कायाकल्प योजना के तहत कार्य कराए जा रहे हैं। शीघ्र ही सभी विद्यालयों को 19 बिंदुओं के अनुरूप संतृप्त किया जाएगा।