कछवां। युवाओं ने चारामशीन के सभी छह कारखानों को चालू कराने की आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि इससे बेरोजगारी की समस्या कम होगी। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में प्रत्याशी बंद पड़े कारखानों को चालू करवाने की बात करते हैं, लेकिन चुनाव बाद वादा भूल जाते हैं। अबकी बार जिस पर भरोसा होगा, उसे ही अध्यक्ष की कुर्सी सौंपेंगे।
कछवां में कृषि यंत्रों की छह कारखाने थे, जिसमें हजारों मजदूर काम करते थे। अब हुनरमंद युवा वाराणसी के तीन कारखानों में काम करने को विवश हैं। क्षेत्र के सैकड़ों घरों की रोजी रोटी उसी के सहारे चल रही है। निकाय चुनाव में नवयुवकों की मांग हैं कि कछवां क्षेत्र में बंद पडे कृषि यंत्र कारखाना चालू कराया जाय। अबकी बार के निकाय चुनाव में युवाओं ने ऐसे प्रत्याशी को कछवां की बागडोर सौंपने का मन बनाया है, जो नौजवानों के हित के बारे में सोचता हो। युवाओं का आरोप है कि सरकार की गलत नीतियों व बिजली सुचारू रूप से न मिलने के कारण कारखाने बंद हो गए। क्षेत्र के अजय का कहना है कि ठाकुर प्रसाद के मील में सैकडों मजदूर काम करते थे। कछवां कृषि यंत्र कारखाना बंद होने से सभी बेरोजगार हो गए। उन्होंने कहा कि जो मील को चालू कराएगा उसे ही मतदान करेंगे। आनंद गुप्ता का कहना है कि कारखानों में चारा मशीन बनाता था, जिसको लेने दूर दूर से लोग आते थे। कारखाने से ही क्षेत्र के लोगों का रोजी रोटी चलता था। साथ ही कछवां का नाम होता था। उन्होंने मील को चालू करवाने वाले को ही वोट देने की बात कही। सल्लू गुप्ता का कहना है कि कछवां क्षेत्र में मील बंद होने से नवयुवक बेरोजगार हो गए। किसी भी जनप्रतिनिधि व नगर पंचायत अध्यक्ष ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। नवयुवकों के भविष्य के बारे में सोचने वाले को ही वोट करेंगे। हरिकेश विश्वकर्मा का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष कि कुर्सी पर बैठनल्े के लिए नेता तमाम वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद सभी अपने वादे भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि वोट उसी को देंगे जो क्षेत्र के बारे में सोचेगा। बृजपाल गुप्ता कहते हैं कि जो नवयुवकों को रोजगार के लिए कृषि यंत्र कारखानों को चालू कराएगा उसी को हमारा वोट देंगे। अमरेश चंद्र का कहना है पढ़ा लिखा व शिक्षित नेता ही नगर पंचायत का विकास करवा सकता है। युवाओं के रोजगार की गारंटी जो लेगा उसे ही हमारा वोट पड़ेगा।