रविवार को जिला महिला अस्पताल में भर्ती महिला मरीज
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स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रयास के बावजूद पिछले एक वर्ष के अंदर 36 प्रसूताओं की डिलीवरी के समय या उसके बाद मौत हो चुकी है। इससे समझा जा सकता है कि अधिकारी और कर्मचारी किस जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं। यही स्थिति रही तो शासन द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं पर पूरी तरह से पानी फिर जाएगा।
जिले में पिछले एक वर्ष के दौरान 36 प्रसूताओं की मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। जिसमें वर्ष 2014-15 के दौरान जिन 36 महिलाओं ने प्रसव के दौरान दम तोड़ा उनमें अधिकांश गरीब महिलाएं बताई जा रही हैं।
बता दें कि शासन द्वारा मातृ शिशु दर में कमी लाने के लिए एनआरएचएम योजना चलाई जा रही है। जिसमें जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय टीकाकरण योजना समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए आंगनबाड़ी के माध्यम से उन्हें पोषाहार मुहैया कराया जा रहा है। फिर भी मातृ मत्युदर में कमी नहीं आ रही है। महिलाओं की मौत होने का सिलसिला जारी है।
इसके पीछे स्वास्थ्य विभाग व आंगनबाड़ी केंद्र के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लापरवाही से काम करना बताया जा रहा है। सबसे अधिक लापरवाही आशा एवं एएनएम बरत रही हैं जो महिलाओं के गर्भवती होने के दौरान उन पर ध्यान नहीं देती हैं। समय से पहले कोई जांच नहीं करती हैं।
खानापूर्ति करते हुए डिलीवरी का समय आने पर उसे चिकित्सालय लेकर पहुंच जाती हैं। ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं में खून की अधिक कमी हो जाती है, जिसके चलते वह एनिमिया का शिकार हो जाती है और डिलीवरी के दौरान उनकी जान चली जाती है।
डीएम राजेश सिंह ने भी इसे एक गंभीर मामला बताया है। उन्होंने ऐसी घटनाओं में कमी लाने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।