पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में वन महोत्सव के तहत 26 विभाग मिलकर 79 हजार 51 हजार 990 पौधे लगाएंगे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए वन विभाग, कैमूर वन्यजीव प्रभाग के साथ ही अन्य सभी विभाग पौधरोपण की तैयारी में जुटे हैं। वन विभाग महोत्सव के लिए नि:शुल्क पौधे उपलब्ध करायेगा।
जिले में पांच से सात जुलाई तक तीन दिन तक विशेष पौधरोपण अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश स्तर पर हरियाली लाने के लिए तीन दिन तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसमें पांच से सात जुलाई को विशेष रूप से पौधरोपण किया जाएगा। पौधों को सूखने से बचाने रखने और पौधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। पौधरोपण के लिए नोडल अधिकारी मुख्य विकास अधिकारी श्रीलक्ष्मी वीएस को बनाया गया है। उनकी देखरेख में ग्राम पंचायत स्तर पर अभियान को सफल बनाने के लिए प्रधान तक को अभियान में शामिल किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी पीएस त्रिपाठी का कहना है कि पौधरोपण करने के साथ ही उसे जीवित रखना भी हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि नर्सरी से मिलने वाले पौधे को रोपित करने के पूर्व उसकी पन्नी हटा देनी चाहिए। ताकि मिट्टी के साथ जुड़ कर उसकी जड़ें जमीन से अपना भोजन प्राप्त कर सकें। रोपित पौधों को कुछ माह तक जल देने की जरूरत है। जिले में पौधरोपण के लिए वन प्रभाग मिर्जापुर, कैमूर वन्य जीव प्रभाग तथा 26 अन्य विभागों के लिए पौधरोपण का लक्ष्य तय कर दिया गया है। वन एवं कैमूर वन्य जीव प्रभाग 36 लाख 87 हजार 877 पौधों का रोपण करेंगे। इसी प्रकार ग्राम्य विकास, शिक्षा, पंचायती राज, प्रशासन, कृषि, जिला पंचायत व अन्य विभागों की तरफ से 42 लाख 64 हजार 113 पौधों का रोपण किया जाएगा। इसमें अकेले कृषि विभाग को चार लाख 49 हजार पौधरोपण का लक्ष्य मिला है। जिले की 30 नर्सरियों में वर्तमान में एक करोड़ तीन लाख पौधे उपलब्ध हैं, जबकि पौधरोपण 79 लाख 51 हजार 990 का ही होना है। जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों को भी यहां से पौधे उपलब्ध कराए जा सकते हैं। जिले में 30 नर्सरियां हैं। जिले में सागौन के पौधे का अधिक रोपण होता है। जिले में अधिकतर सागौन के साथ फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। इसमें सागौन, आंवला, अमरूद, जामुन, बेर, बेल, शीशम व आम के पौधे शामिल हैं। पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार कर लिए गए हैं। निर्धारित समय पर सभी जगह पौधरोपण किया जाएगा।