मिर्जापुर। अपर सत्र न्यायाधीश पीएन श्रीवास्तव ने बलात्कार के दो मामलों के दो आरोपियों की जमानत अर्जी को शनिवार को निरस्त कर दी। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त का कृत्य अत्यंत गंभीर है। ऐसी परिस्थितियों में जमानत पर रिहा करने का पर्याप्त आधार नहीं है। इसलिए जमानत अर्जी को निरस्त किया जाता है।
जिगना थाना क्षेत्र के एक गांव निवासिनी किशोरी एक जून को बहन के साथ गंगा में स्नान करने गई थी। जहां पहले से मौजूद इलाहाबाद जनपद मांडा थाना क्षेत्र के दीघिया गांव निवासी सूरज माझी पुत्र परुषोत्तम उसे गंगा के पानी में खींच ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुराचार समेत अन्य आरोप में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं दूसरे मामले में अहरौरा थाना क्षेत्र के एक गांव के सूरज पुत्र परदेशी के ऊपर आरोप है कि एक विद्यालय में पढ़ने गई किशोरी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पुलिस ने सूरज को गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया था। दोनों मामलों में आरोपियों ने अपने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में जमानत अर्जी दी थी। जिसका विरोध सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सच्चिदानंद तिवारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता फौजदारी रमेंद्र कुमार शुक्ला ने किया। अधिवक्ताओं की दलील तथा पत्रावली साक्ष्य के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।