मिर्जापुर। मुहर्रम पर शुक्रवार को नगर के इमाम चौकों से मातमी माहौल में ताजिये निकाले गए। विभिन्न मुहल्लों से होते हुए ताजिए फत्ते खां के बाड़ा पर एकत्रित हुए। यहां ताजियेदार कतारबद्ध होकर ताजिये के साथ इमामबाड़ा के लिए रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह विभिन्न अखाड़े के युवाओं ने करतब दिखाए। इमामबाड़ा स्थित कर्बला में ताजिये दफ्न किए गए। इस दौरान सबकी आंखें नम हो गईं।
मुहर्रम पर जिले के 569 इमाम चौकों से कड़ी सुरक्षा में विभिन्न अंजुमन कमेटियों की ओर से मातमी माहौल में ताजिए निकाले गए। अंजुमन कमेटियों की ओर से निकाले गए ताजिये के साथ बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और बच्चे चल रहे थे। ताजिए के जुलूस में या हुसैन की सदाओं से पूरा माहौल मातमी हो रहा था। नवी मुहर्रम को ताजियादारों ने ताजिये को इमाम चौकों पर रखा और हजरत इमाम हुसैन को याद किया। समस्त इमाम चौकों पर रात में तकरीर भी हुई। वहीं इमाम हुसैन की याद में नौहा एवं मर्सिया पढ़े गए। मुहर्रम के दिन नगर के गोसाईं तालाब, घोड़े शहीद रामबाग, पूरी कटरा, अमानगंज, लालडिग्गी, तरकापुर, वासलीगंज, मकरीखोह, रानीबाग, रतनगंज, छोटा मिर्जापुर, हयात नगर, नटवां, सबरी, भैसहिया टोला आदि मुहल्लों से लोग अपने अपने ताजिये को लेकर नगर के फत्ते खां के बाड़ा में एकत्रित हुए। फत्ते खां के बाड़ा से एकत्रित होकर विभिन्न अंजुमन कमेटियों के ताजिये एक साथ कतारबद्ध होकर इमामबाड़ा स्थित कर्बला के लिए रवाना हुुए। कर्बला पहुंचने पर मातमी माहौल में ताजिए को दफन किया गया, जिससे पूरा माहौल गमगीन हो गया। रास्ते भर एक से बढ़कर एक ताजिया को देखने के लिए सड़क की पटरियों पर लोगों का हुजूम लगा रहा। ताजियों के आगे पुलिस व पीएसी के जवान चल रहे थे। रास्ते में जगह-जगह ताजियादारों के लिए शर्बत पीने के पानी की भी व्यवस्था रही। ताजिया के जुलूस के समय मार्गों को डायवर्ट कर दिया गया था। ईदगाह के इमाम मौलाना हाफिज निसार अहमद ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन ने मानवता की रक्षा के लिए अपना पूरा खानदान कुर्बान कर दिया था। उन्होंने बताया कि इमाम हुुसैन ने हमेशा अमन, शांति एवं मानवता पर बल दिया।