लालगंज। क्षेत्र के खजुरी स्थित परमहंस पर अड़गड़ानंद महाराज के शिष्य स्वामी भावानंद महराज ने कहा कि मनुष्य सत्य, रज व तम के जाल में फंसा है, जो दुख का कारण है। सद्विचार सुख शांति के साधन है।
कहा कि सांसारिक जीवन में कर्म और कर्तव्य की साधना करना चाहिए, इससे त्याग और तपस्या का जन्म होता है। सोमवार वर्ष के पहले दिन स्वामी भावानंद महराज ने कहा कि तुलसीदास ने रामचरित्र मानस में सुख शांति और साधना के उपाय विधिवत बताए हैं। बिना सदगुरू के मनुष्य भटकता रहता है, उसको सही राह नहीं मिलता है, जिससे उसका पतन हो जाता है। कहा कि मीरा सारे तानों का जहर पीकर भी अपने राह से नहीं भटकीं। उन्होंने बताया कि मन का कुतर्क ताड़का और उसका बेटा सुबाहू है। विघ्न के बारे में कहा कि बात बात पर झगड़ा करना विघ्न है। ऐसा स्वभाव जीवन और परिवार के लिए बाधा उत्पन्न करता है। ऐसे स्वभाव से घर परिवार में अशांति बनी रहती है। कहा कि भजन और गीता पाठ से ऐसे स्वभाव को बदला जा सकता है। सदगुरू के संगत से शांति और विकास का मार्ग मिलता है। भगवती कथा के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर आयोजक शंभू पाल, गणेश यादव, बच्चू प्रसाद पाल, आदित्य यादव, अरविंद यादव, राजेंद्र सिंह यादव, शमला पटेल, डा. आरआर कुपवाड़ा आदि भक्त रहे।