स्थानीय वन क्षेत्र के मड़वा धनावल चलंगा पहाड़ के पास मंगलवार की रात हिंसक जंगली जानवरों के हमले में हाते में बंधी 17 बकरियों की मौत हो गईं। जबकि 12 बकरियां घायल तथा छह लापता बतायी जा रही हैं। बकरी पालक ने बकरियों पर बाघ द्वारा हमला करने की आशंका जताई है।
जानकारी के अनुसार मड़वा धनावल गांव निवासी केशई पाल ने चलंगा पहाड़ के पास हाते में अपनी 35 बकरियों को बांध रखा था। बकरी पालक के मुताबिक मंगलवार की रात जंगल से निकलकर आए किसी हिंसक जानवर ने हाते में बंधी उनकी बकरियों के झुंड पर हमला कर दिया। बुधवार की सुबह केशई बकरियों को चारा देने के लिए वहां पहुंचे तो हाते में बंधी अधिकांश बकरियों को मृत अवस्था में देख उसके पैरों तले से जमींन खिसक गयी। कुछ घायल और कुछ लापता हैं। घटना की जानकारी होते ही ग्राम प्रधान रमेश सिंह सहित आसपास के लोगों की भीड़ हाते के पास जुट गयी। आनन-फानन ग्राम प्रधान ने घायल बकरियों के इलाज के लिए पशु चिकित्साधिकारी को सूचना देने के बाद क्षेत्रीय वनाधिकारी वीके तिवारी को भी इस घटना की जानकारी दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल के समीप स्थित गांवों में हिंसक जानवर आए दिन पालतू पशुओं पर हमला कर देते हैं। जिससे पशुपालकों का भारी नुकसान हो जाता है। बकरी पालक किसानकेशई पाल ने आंकलन कर क्षतिपूर्ति दिए जाने की मांग की है।
डीएफओ ने टीम गठित कर घटनास्थल पर भेजा
मड़वा धनावल चलंगा पहाड़ के पास अहाते में बंधी बकरियों पर जंगली जानवरों के हमले की शिकायत का मामला संज्ञान में आने पर प्रभागीय वनाधिकारी पीएस त्रिपाठी ने टीम गठित कर मौके लिए रवाना किया।
डीएफओ ने क्षेत्रीय वनाधिकारियों की टीम बनाई है पहली टीम में क्षेत्रीय वनाधिकारी वीके तिवारी ड्रमंडगंज, वन दरोगा अमृत लाल, वन रक्षक सर्वेश कुमार, राजदीप वर्मा व संजीव कुमार को शामिल किया गया है। इसी तरह दूसरी टीम में वन क्षेत्राधिकारी पी के सिंह लालगंज, वन दरोगा विन्येंद्र सिंह यादव, दशमी राम के अलावा वन रक्षक अनादि नाथ तिवारी व पिंटू लाल को शामिल किया गया है। प्रभागीय वनाधिकारी के निर्देश पर बुधवार को जहां मड़वा धनावल चलंगा पहाड़ पहुंची टीम आसपास के क्षेत्रों में जंगली जानवर होने की जांच पड़ताल में लगी हुई है। वहीं ध्वनि विस्तारक यंत्र से ग्रामीणों को सजग करने में जुटी रही।
वन विभाग की मनाही के बावजूद ग्रामीण मवेशियों को जंगलों की ओर लेकर जाते हैं। घर लौटने के बजाए वह जंगलों के आसपास अहाता बनाकर रात में मवेशियों को रोक देते हैं। मृत बकरियों का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही जंगली जानवर के बारे में पड़ताल कराया जा रहा है।
- पीएस त्रिपाठी, प्रभागीय वनाधिकारी मिर्जापुर।