मिर्जापुर। नगर पालिकाध्यक्ष व जिलाधिकारी में आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को डीएम अनुराग पटेल ने कहा कि नवरात्र के लिए आए धन में शासन के निर्देशानुसार 18 लाख 66 हजार रुपये नगर पालिका को दिया जा चुका है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय वित्त आयोग एवं 14 वें वित्त आयोग को स्वीकृति कृत कार्यों के सत्यापन रिपोर्ट के बाद ही दी जाएगी।
विकास कार्यों की चर्चा करते हुए डीएम ने कहा कि अब तक नगर पालिका परिषद को तीन करोड़ 22 लाख रुपये की धनराशि का आवंटन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विसुंदरपुर तालाब के लिए 59 लाख 43 हजार, सुरेकापुरम व कजरहवा पोखरा के लिए 53 लाख 73 हजार तथा विभिन्न अंत्येष्टि स्थलों के लिए एक करोड़ 27 लाख 86 हजार रुपये दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अवस्थापना निधि, राज्य वित्त आयोग व 14 वां वित्त आयोग में जिले की किसी नगर पा लिका को विकास कार्यों को कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई थी। केवल मिर्जापुर नगर पालिका को ही स्वीकृति दी गई थी। इस आयोग के कार्यों की स्वीकृति का अधिकारी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को ही है। 31 जनवरी को इस समिति की बैठक हुई थी। इसमें कार्यों का विवरण दिया गया था। उसमें यह भी निर्णय लिया गया था कि संबंधित एसडीएम, ईओ, पीडब्लूडी के अधिशासी अभियंता व आरईएस के अधिशासी अभियंता की टीम कार्यों का निरीक्षण करेंगी और आख्या देगी कि कार्य संतोषजनक है और उसकी पुनरावृत्ति तो नहीं हुई है। कुछ कार्यों को अवश्य शामिल नहीं किया गया। इसमें विभिन्न जगहों पर बनने वाले पिंक टायलेट शामिल हैं। डीएम अनुराग पटेल ने कहा कि निविदाओं की स्वीकृति का कार्य नगर पालिका का है। डीएम उसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करते। शासन का प्रतिनिधि होने के नाते उसका यह दायित्व है कि वह वित्तीय कार्यों की गुणवत्ता व धनराशि का सदुपयोग सुनिश्चित करे।