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स्वाधार गृह की महिलाओं व बालिकाओं के उम्र की होगी जांच

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मिर्जापुर। जिले के स्वाधार गृहों में रखी गई महिलाओं और बालिकाओं के उम्र का सत्यापन किया जाएगा ताकि उन्हें समय से न्याय मिल सके और किसी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े। अपर मुख्य सचिव ने इस संबंध में जिला परिवीक्षा अधिकारी को दिशानिर्देश जारी किया है।
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भूली भटकी और पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को स्वाधार गृह में रखा जाता है। जिले में उत्तर प्रदेश महिला कल्याण निगम लिमिटेड और स्वैच्छिक संगठनों की ओर से स्वाधार गृहों का संचालन किया जा रहा है। स्वाधार गृहों में रहने वाली महिलाओं और बालिकाओं के आयु प्रमाणित नहीं होने से अक्सर उन्हें न्याय मिलने में परेशानी होती है। इसको दूर करने के लिए शासन ने ठोस कदम उठाया है। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने महिलाओं की समस्याओं के समाधान और उनको त्वरित न्याय दिलाने का निर्देश सभी उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी और जिला परिवीक्षा अधिकारियों को दिया है। उन्होंने स्वाधार गृहों में रहने वाली महिलाओं और बालिकाओं के उम्र का सत्यापन कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के आयु का सत्यापन के लिए बोन डेनसिटी जैसे फोरेंसिक जांच के माध्यम से आयु का सही अंकन कराया जाएगा। इससे शारीरिक शोषण का शिकार होने वाली महिलाओं अथवा बालिकाओं को काफी राहत मिलेगी। मिर्जापुर जिले में ज्ञानोदय बालगृह बालिका पक्का पोखरा में 15 बालिकाएं, स्वाधार गृह आमघाट में दो महिलाएं, स्वाधार गृह मड़िहान में 10 महिलाएं, मधु ग्राम विकास की ओर से संचालित स्वाधार गृह लालगंज में 24 महिलाएं और अनिता बालगृह बालिका चुनार में 95 बालिकाएं हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी अमरेंद्र पोत्सायन ने कहा कि पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को न्याय दिलाने का कार्य किया जा रहा है। स्वाधार गृह में रहने वाली बालिकाओं और किशोरियों के आयु का सत्यापन कराया जाएगा।
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