मिर्जापुर। बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के आयुर्वेद संकाय के तत्वाधान में चल रहे आयुर्वेद एवं योेग दो दिवसीय अंर्तराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सोमवार को हुआ। संगोष्ठी में आयुर्वेद एवं योग पर तत्कालीन प्रगति व आगामी दृृष्टिकोण विषयक पर चर्चा की गई। अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य प्रभारी प्रो. साकेत कुशवाहा ने हरित एवं जैव कृषि के साथ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों एवं औषधीय पौधों के उत्पादन द्वारा भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम संयोजक डा. देव नाथ सिंह गौतम ने कार्यक्रम की प्रगति, उद्देश्य एवं उपलब्धियों का ब्योरा देते हुए इसके औपचारिक समापन सत्र की शुरुआत की। समापन सत्र के मुख्य अतिथि बीएचयू के तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरएस दूबे ने आयुर्वेद व योग में वैज्ञानिक पुष्टिकरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शोध की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि कैमरुन विश्वविद्यालय के प्रो. केनेथ योगाबी आनचोंग एवं उपाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार सिंह ने योग व आयुर्वेद की महत्ता पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि अफ्रीका के शोध वैज्ञानिक डॉ. क्रिस्टोफर एन्जी तथा नोएला एपी ने योग के बारे में बताया। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के सात तकनीकी सत्रों में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें मधुमेह एवं गुर्दा रोग के प्रवंधन में आयुर्वेद व योग की महत्ता, योग थेरेपी के वैज्ञानिक पुष्टिकरण, औषधीय पौधें के उत्पादन, संकलन एवं विपणन से संबंधित शोध पत्र प्रमुख रहे। देश-विदेश के लगभग 400 प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। इसमें कुल 11 विशिष्ट व्याख्यान, 22 अतिथि व्याख्यान तथा 100 से अधिक प्रस्तुतिकरण हुए।