बालिका के बोरवेल में गिरने के बाद पहुंचे पुलिस अधिकारी
मड़िहान। लालगंज थाना क्षेत्र के सहरसा गांव में मां के साथ खेत पर गई बालिका जमीन के गहरे बोर में गिरकर घंटों जीवन और मौत के बीच संघर्ष करती रही। पुलिस और प्रशासन की मदद काफी देर में मिलने के कारण बालिका की हालत की गंभीर होती गई। लोगों को उसके जीने की उम्मीद तब जगी जब रात करीब नौ बजे आक्सीजन की पाइप बोर डाली गई तो बालिका ने पाइप पकड़ ली। यह देख सभी के मन में एक आस जग गई कि बालिका अभी जीवित है। एनडीआरएफ की टीम भी बचाव कार्य में देर रात पहुंचकर जुट गई। देर रात तक पुलिस और प्रशासन वरिष्ठ अफसर मौके पर जमे रहे।
बताया जाता है कि स्थानीय गांव निवासी नजीर अपने खेत मे तीन माह पूर्व बोरवेल मशीन से आठ इंच का बोर कराया था। हालांकि की उस समय बोर में पानी नही मिला था।और खुला ही बोर को छोड़ दिया।नजीर के खेत के बगल में सूर्यलाल आदिवासी का खेत है। सूर्यालाल अपने खेत मे गौशाला बनाकर पशुओं को रखता था। सूर्यालाल की पत्नी मंजू सोमवार को अपनी तीन वर्षीय पुत्री रुपांजली के साथ पशुओं को पानी पिलाने गई थी। रुपांजली को एक स्थान पर बैठाकर मंजू पशुओं को पानी पिलाने लगी। कुछ देर बाद रुपांजली माँ की नजरों से ओझल हो गयी।नजर पड़ी तो बोर के पास देख माँ की सांसें थम गई। रुपांजली को गोंद में उठाने के लिए माँ ज्यों ज्यों आगे बढ़ती गयी वह बोर की तरफ खिसकती गयी। कलेजे के टुकड़े को ज्यों ही उठाना चाही बालिका बोर में खिसक गई। नीचे 70 फिट गहरे बोर से रोने की आवाज तो आ रही थी। बचाव कार्य के बीच ही रात नौ बजे के बाद एसपी आशीष तिवारी एवं केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के निर्देश पर जिलाध्यक्ष रमांकांत कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचकर केंद्रीय राज्यमंत्री को स्थिति से अवगत कराया। परिवार को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन दिया।
सहरसा गांव निवासी सूर्यलाल को तीन बच्चे है। इसमें सबसे बड़ी एक बेटी है जबकि दूसरे नंबर पर बेटा है। जबकि रूपांजली सबसे छोटी बेटी है। सूर्यलाल किसानी कर परिवार का खर्च चलाता है। रुपांजली के माता पिता देर रात तक सदमे में रहे। वह बोरेवेल के पास ही बेटी के बाहर निकालने का इंतजार करते रहे। उधर ग्रामीणों ने नजीर द्वारा बोरिंग खुला छोड़े जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।