विंध्याचल (मिर्जापुर)। श्री विंध्य प्राचीन रामलीला समिति के तत्वावधान में स्व. रविंद्र नाटक की रामलीला मंचन के छठे दिन मंचन देखने दर्शकों का हुजूम उमड़ा। विंध्य क्षेत्र के मोतीझील मार्ग स्थित अमर सिंह फैंस एसोसिएशन परिसर में भव्य रामलीला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मनोज जायसवाल एवं वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित बच्चा मिश्रा ने विधि-विधान पूर्वक श्रीरामचंद्र जी का पूजन-अर्चन व भव्य आरती कर किया। सीता की खोज का भव्य मंचन किया गया।
रामलीला मंचन के क्रम में श्रीराम एवं लक्ष्मण मामा मारीच का वध करने के पश्चात पंचवटी वाटिका में आते हैं तो माता जानकी को न देख प्रभु व्याकुल हो जाते हैं और पूछते हैं कि भाई माता जानकी कहां है। लक्ष्मण उत्तर देते हैं कि मैं आपके प्राणों की रक्षा के लिए गया था। माता जानकी को कुटिया की बाहर न निकलने के लिए लक्ष्मण रेखा खींचकर गया था। श्रीराम और लक्ष्मण माता जानकी का पता लगाने के लिए वन-वन भटकने लगे। रास्ते में जटायु मिलते हैं और कहते हैं भगवान दक्षिण दिशा की ओर रावण माता जानकी को हरण कर ले जा रहा था, तो मैं उनसे युद्ध करते हुए घायल हो गया हूं। जानकी की खोज करते हुए सुग्रीव से उनकी की मित्रता होती है तो भगवान की सारी बातें सुनकर सुग्रीव अपने वानर को माता जानकी की पता लगाने के लिए अपने अपने गुप्तचर लगा देते हैं। लीला के अगले क्रम में युद्ध करते समय श्रीराम ने बाली का वध कर देते हैं। राजा सुग्रीव ने हनुमान, नल-नील को आदेश देते हैं कि समुद्र उस पार जाने की तैयारी करें। माता सीता की खोज में वन में शबरी ने श्रीराम को खाने के लिए अपनी जूठी बेर खिलाया। श्रीराम की भूमिका में प्रशांत द्विवेदी, लक्ष्मण रजत द्विवेदी, हनुमान कमलेश्वरपति त्रिपाठी, सुग्रीव निशू मिश्रा, बाली प्रिंस मिश्रा, जटायु हर्ष द्विवेदी, सबरी मनोज शर्मा, नील ,उत्कर्ष द्विवेदी बने। मंच का संचालन आदर्श उपाध्याय ने किया। इस दौरान संस्था अध्यक्ष इं. कुलपाल सिंह जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष प्रकाश चंद पांडेय, मंत्री संगम लाल त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष देवी दीक्षित, सह मंत्री प्रशांत द्विवेदी, निरीक्षक आदर्श उपाध्याय, मीडिया प्रभारी संतोष कुमार आदि रहे।