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फसलों के अपशिष्ट जलाने से खत्म होती है उर्वरा शक्ति

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मिर्जापुर। खेत में फसल के अवशेष को जलाने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण आदेश के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें कृषि भूमि का क्षेत्रफल दो एकड़ से कम होने पर 2500 प्रति घटना तथा अधिकतम 15 हजार रुपये तक का अर्थ दंड लगेगा। उप कृषि निदेशक अशोक कुमार उपाध्याय ने बुधवार को बताया कि फसलों के अपशिष्ट खेतों में जलाने से उर्वरा शक्ति धीरे-धीरे नष्ट हो जाती है। उन्होंने किसानों से कहा कि वह गेहूं की कटाई के बाद फसलों के अपशिष्ट को खेतों में कदापि न जलाएं। फसलों के अवशेष को जलाने से जड़, तना, पत्तियों में संचित लाभदायक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
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उप कृषि निदेशक ने बताया कि पौधों के बढ़ने के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जिसमें कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन प्रकृति से प्राप्त होता है। ये तत्व पौधों के लगभग 95 प्रतिशत भाग के निर्माण में सहायक है। इसके अतिरिक्त नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश आदि तत्व पौधों के बढ़वार एवं उत्पादन में सहायक होते है। पौधों के विभिन्न अंगों के बढ़ने हेतु उक्त पोषक तत्व पौधों के जड़ों द्वारा, पत्तियों द्वारा, तनों द्वारा मृदा से अथवा वातावरण से ग्रहण करते है। किसान फसलों की कटाई, मड़ाई करते है तो जड़, तना, पत्तियों के रूपों में पादप अवशेष भूमि के अंदर एवं भूमि के ऊपर उपलब्ध होते है। किसान फसलों के अवशेषों के कदापि नहीं जलाएं। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों को जलाने से मृदा ताप में बढ़ोत्तरी होती है जिसके कारण मृदा के भौतिक, रसायनिक एवं जैविक दशा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पादप अवशेषों में लाभदायक मित्र कीट जलकर मर जाते है, जिसके कारण वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। पशुओं के चारे की व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, जिससे सांस संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है एवं जलवायु के ऊपर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। किसान रीपर युक्त कंबाईन मशीन का ही प्रयोग करें।
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