कछवां (मिर्जापुर)।
मझवां ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बाड़ापुर गांव में बनाए जा रहे शौचालयों में घोटाले का खुलासा हुआ है। ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों ने मिलीभगत कर मृतकों और सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के नाम पर शौचालय जारी कर दिया है। साथ ही एमआईएसए सूची में कई ग्रामीण ऐसे भी हैं, जिनके नाम पर दो शौचालय दर्ज हैं। वहीं, अधिकारी कंप्यूटर की गलती से नाम गलत छपने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
कछवां थाना क्षेत्र के गांव बाड़ापुर, गड़ौली, चकिया, आही, बरैनी, मझवां, सबेसर गांव में स्वच्छ भारत मिशन के तहत 1938 शौचालय बनवाने का लक्ष्य दिया गया था। इन शौचालयों को निर्माण के लिए धनराशि सेक्रेेटरी और प्रधान के खाते में आती है। तब उन लाभार्थियों को चेक देते हैं जिसका एमआईएस लिस्ट में नाम रहता है लेकिन प्रधान वियरर चेक काटकर स्वयं पैसा निकाल ले रहे हैं और उसी पैसे के माध्यम से ही प्रधान गांव में स्वयं शौचालय का निर्माण करवाता है। बाडापुर, बरैनी, आही, चकिया, मझवां, सरावां गांव में शौचालयों का सर्वे यूनिसेफ की टीम ने कराया था। सर्वे के बाद जब लाभार्थियों की सूची निकली तो उसमें कई ऐसे नाम सामने आए, जिनकी काफी पहले मौत हो चुकी है। वहीं कुछ ऐसे भी थे जो सरकारी नौकरी करते है और कुछ पेंशनधारी है। दूसरी तरफ, गांव में कई परिवार ऐसे हैं जो शौचालय बनवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। मृतक चेतनारायण सिंह बाड़ापुर और रामजी बिंद सरावा तथा कृषि विभाग से सेवानिवृत्त प्रद्युम्न सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक नंदराज सिंह और नौकरीपेशा स्वास्थ्य विभाग में आई टेक्निशियन संतोष सिंह, कोटेदार विजेंद्र सिंह को शौचालय दिया गया है। बाड़ापुर के सतीश राय ने फर्जीवाड़े की शिकायत जिलाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री से की है।
मृतकों, नौकरीपेशा, सेवानिवृत्त और कोटेदारों को शौचालय जारी नहीं करना है। कोटेदारों को स्वयं पांच शौचालय बनाना है। यदि स्वयं अपने घर में शौचालय बनवाया गया है तो अपात्रों से धन की वसूली होगी। - विनोद कुमार, एडीओ पंचायत, मझवां