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ौधरोपण कर पृथ्वी बचाने का दिया संदेश

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मिर्जापुर। विश्व पृथ्वी दिवस पर रविवार को वन विभाग के अलावा विभिन्न संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक किया गया। कई स्थानों पर पौधरोपण किया गया।
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बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित गंगा हरितिमा अभियान के तहत विधायक रमाशंकर सिंह पटेल और रत्नाकर मिश्र ने पौधरोपण किया। कहा कि बिना पेड़ों के जीवन मुश्किल है। पौधा लगाकर पृथ्वी का शृंगार और संरक्षण किया जा सकता है। इस दौरान डीएफओ राकेश चौधरी, मुख्य वन संरक्षक प्रभाकर दुबे, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रतन कुमार मिश्र, ग्रीन गुरू अनिल कुमार सिंह ने भी पौधरोपण किया। ड्रमंडगंज में ड्रमंडगंज वन रेंज परिसर में वन क्षेत्राधिकारी सहित वनकर्मियों एवं प्रधान ने एक एक पौधरोपण किया। वन क्षेत्राधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि वृक्षों की कमी के कारण तापमान बढ़ता चला जा रहा है। इस तपती धूप में लगाये गये पौधों को भी खतरा है। सभी नागरिकों का दायित्व होता है कि सब अपने घर पर पौध रोप कर पर्यावरण संरक्षण तथा हरित क्रांति में भागीदार बनें। जुलाई में पौधरोपण का कार्य युद्धस्तर पर चलाया जाएगा। प्रधान तथा आम नागरिक भी नि:शुल्क पौध लेकर पौध रोपण करें जिससे पर्यावरण संतुलित हो सके। अगर पृथ्वी पर वृक्षों की कमी हो जाएगी तो आक्सीजन का भी अभाव हो जाएगा। इस मौके पर डिप्टी रेंजर पप्पू राम, लव कुमार मिश्रा, महेश प्रताप सिंह, प्रधान शांति देवी, लवकुश केशरी, मूलचंद आदि लोग उपस्थित रहे।
पहाड़ी के ब्लाक सभागार में पृथ्वी दिवस व गंगा सप्तमी पर गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान मुख्य अतिथि प्रमुख पहाड़ी पुष्पलता पडा व विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय वन अधिकारी विंढमफाल आरबी यादव रहे। मुख्य अतिथि द्वारा पृथ्वी के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की गई। विशिष्ट अतिथि ने गंगा के किनारे वृक्षारोपण के संबंध में बताया। किसानों को अपने खेतों के मेड़ पर पेड़ लगाने की बात कही। लोगों ने पौधरोपण का संकल्प लिया गया। मुख्य अतिथि ने पौधरोपण किया। इस दौरान अमित ओझा, रामदेव सरोज, वन दरोगा मुहम्मद अजहर, सीताराम सोनकर, मनोज कुमार, संजय गुप्ता, रामलाल, शिवहरि अग्रहरी, रोहित मोदनवाल आदि रहे।
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उधर, बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि विज्ञान संस्थान के मृदा वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह ने बताया कि विश्व पृथ्वी दिवस पर जनता को सजग होने की आवश्यकता है। वर्तमान समय में प्रति व्यक्ति .01 प्रतिशत औसल क्षेत्रफल घट रहा है। वहीं 33 प्रतिशत वन क्षेत्र होना चाहिए, जिसके सापेक्ष मिर्जापुर जिले में 29 प्रतिशत वन क्षेत्र रहा गया है। जनसंख्या बढ़ने के कारण आज पृथ्वी पर प्रति व्यक्ति औसन क्षेत्रफल घट रहा है। संपूर्ण भू-भाग 70 प्रतिशत जल है। विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का मात्र दो प्रतिशत भाग ही हमारे पास है। जिसमें से क्षेत्रफल के अनुसार 32.9 करोड़ भूमि हमारे देश में उपलब्ध है। जिसमे से 329 मिलियन हेक्टेयर पर खेती होती है तथा शेष भूमि विभिन्न समस्याओं से प्रदूषित है। जिसे प्रयास करके सुधारा जा सकता है। भारत के पास विश्व में सबसे अधिक कृषि जोत मृदा है जिस पर खेती की जा सकती है। विश्व की कुल 12 प्रकार की मृदाओं में 8 प्रकार की मृदा भारत में पायी जाती है इसी कारण भारत जैसे देश में जैव विविधता का भण्डार है। मृदा एक अनमोल प्राकृतिक संसाधन है जो हमें धरोहर के रूप में प्राप्त हुआ है। लगभग 01 सेमी. मृदा के निर्माण में 100 से 400 वर्ष तक का समय लगता हैं। क्योंकि यह एक जीवित संसाधन है। विभिन्न प्रकार की अमानवीयकृत क्रियाओं के कारण निरन्तर हमारी पृथ्वी का संतुलन बिगड़ता जा रहा है।
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