ड्रामंडगंज। सात मासूमों की जिंदगी बचाने व कई घरों के चिराग को बुझने से बचाने वाले दो बहादुर दंपतियों को जिला प्रशासन आज भूल चुका है। दो ऐसे दंपति जो असली हीरो कहलाने के हकदार हैं, जिन्होंने नहर में डूब रहे सात मासूम बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया था। जिला प्रशासन ने जान बचाने वाले दोनों दंपतियों को हाथों हाथ लिया था। क्षेत्र के अलावा जिले भर में उनके बहादुरी के चर्चे भी हो रहे थे। जिलाधिकारी ने उन्हें आवास व पुरस्कार देने के साथ ही 26 जनवरी को बहादुरी के सम्मान से नवाजने के लिए भी कहा था। समय बीतने के साथ ही जिला प्रशासन भी उन्हें भूल चुकी है।
गौरतलब हो कि आठ नवंबर दिन बुधवार हलिया थाना क्षेत्र के हड़सड़ गांव स्थित श्री रामा इंटर नेशनल स्कूल का वैन मैक्स जीप चालक सुबह आठ बजे क्षेत्र के अमदह, इंदवार, गड़बड़ा गोकुल, गड़बड़ा राजा से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। वैन जैसे ही सुखड़ा नहर के पास पह़ुंची अनियंत्रित होकर नहर में गिरकर पलट गई। वैन में एलकेजी, यूकेजी, एक, दो, व तीन के कुल 27 बच्चे सवार थे। जिसमें गौरव जायसवाल, सौरव जायसवाल, शौर्य जायसवाल, श्रेया जायसवाल, निवासी गड़बड़ा गोकुल व स्वेता कुमारी, शौम्या कुमारी, अंस, कर्तव्य, अंकित, अनुराग निवासी गड़बड़ा एवं राजा, प्रशांत,सिद्धांत मिश्रा, प्रहलाद, अर्पित कुमार, अनुराग, अभिषेक, आकांक्षा, ओम कुमार, मंशी राय निवासी इंदवार व सौम्या सिंह, परी सिंह, विवेक सिंह, दिव्या सिंह, अमित निवासी अमदह समेत शामिल थे। वैन पलटने पर 20 बच्चों ने कूद कर अपनी जान बचाई, जबकि सात बच्चे नहर में डूबने लगे। पास खड़े गांव के दो दंपतियों संतोष शर्मा तथा उसकी पत्नी माया शर्मा तथा महेंद्र और उसकी पत्नी चंद्रकला निवासी महुगढ़ ने डूबते बच्चों को बचाने के लिए नहर में छलांग लगा दिया। सभी को सही सलामत बाहर भी निकाल लिया। मामले की जानकारी जिलाधिकारी को होने पर उन्होंने दोनों बहादुर दंपतियों को आवास व नकद राशि से पुरस्कृत करने का आश्वासन दिया था। लेकिन 40 दिन बीतने के बाद भी दोनों दंपतियों का हाल जानने व जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित करने की प्रक्रिया अभी तक नहीं शुरू की गई है। सात मासूम बच्चें की जान बचाने वाले महुगढ़ निवासी संतोष शर्मा भूमिहीन हैं। वह पत्नी माया के साथ वन विभाग की जमीन पर झोपड़ी बनाकर रहता है। उधर महेंद्र कुमार कोल पत्नी चंद्रकली महुगढ़ ग्रामसभा में नहर किनारे वन विभाग की जमीन पर कच्चा मकान बनाकर रहते हैं। महेंद्र मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करता है।
ग्राम प्रधान महुगढ़ रामसखा ने बताया कि ग्राम सभा में बंजर भूमि नहीं है, जिसके कारण दोनों दंपतियों को पट्टा नहीं मिल पा रहा है। गरीबी व तंगी में जीवन जीने वाली दंपतियां जिला प्रशासन की पहल के इंतजार में हैं। वहीं क्षेत्र के लोगों का कहन है कि जिला प्रशासन उनकी उपेक्षा कर रही है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से बहादुर दंपतियों को सम्मानित करने की मांग की है।