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बांध की जमीन भूमिहीनों के जगह काश्तकारों को आवंटित

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ड्रमंडगंज। क्षेत्र के अदवा बांध से पट्टे के चक्कर में पानी निकाल दिया गया। इसके बावजूद अदवा बांध के अंदर विस्थापितों को जमीन नहीं मिल पाई है। जलाशय की भूमि पर पर बाहरी तथा बड़े लोगों का कब्जा हो गया है। जबकी शासन के निर्देश के अनुसार विस्थापितों व दलितों को जमीन आवंटन करना है।
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अदवा जलाशय में 14 गांव डूब क्षेत्र से प्रभावित हैं, इसमें दस गांव आंशिक रूप से और चार गांव पूर्ण रूप से डूब क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। विभागीय अधिकारियों के चलते जुलाई अगस्त माह में बांध भर जाने के बाद गेट खोलकर कई दिनों तक पानी निकाल कर अगस्त के लिमिट के हिसाब से पानी रखा गया। बांध से निकले विस्थापितों को खाली जमीन पर पट्टे न देकर बाहरी तथा क्षेत्र के बड़े काश्तकारों को दे दी गई है। बांध की खाली भूमि पांच वर्षीय पट्टा हेतु गुर्गी, कोठी खुर्द, अहुगी कला, बडौही, बेलगवा, सांगो, चतुर्भुजा, की जलाशय भूमि को बांध से पानी निकाल कर विस्थापितों को पट्टा न देकर अधिकारियो के कृपा पात्र एवं अपने चंद्रलाभों के चलते बड़े काश्तकारों को दे दिया गया है। कोठी कला में मनमानी तौर पर सरहंगो द्वारा जलाशय की भूमि जोत ली गई, जबकि शासन का निर्देश है कि विस्थापित, भूमिहीन एवं दलितों को प्राथमिकता के आधार पर जलाशय की भूमि देना था। जलाशय की कुछ भूमि गरीबों के नाम पर एक वर्षीय पट्टे जरूर दिए गए हैं, लेकिन मौक पर उस जमीन को काई और जोत बो रहा है। भूमि जिसको दी गई है उसका कहीं अतापता नहीं है। इस सबंध में वैधा गांव निवासी टुन्नू कोल, पप्पू कोल, आजाद कुमार, दीपक, संतोष कोल, राम तीर्थ कोल, राम मनोज पाल, विष्णु दलित का कहना है की उच्चाधिकारियों व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से शिकायत के बाद भी बांध से निकालकर हम लोगों को जलाशय की भूमि नही मिल पाई। अधिकारियों के पास महीनों चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नही हुई।
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