अनुज सिंहल ने बताया कि हरविंदर की फैक्ट्री में 10-12 कर्मचारी काम करते हैं और यह पिछले 30 साल से मझोले स्तर पर चल रही थी। पिंटू के दो बेटे, अवनीत और सवनीत, और एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। उनका परिवार मूल रूप से पाकिस्तान के सियालकोट का रहने वाला है, जो भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद मेरठ के जवाहर क्वार्टर में बस गया था। पिंटू के बड़े भाई की भी दिल्ली रोड पर साईं पुरम में अलग फैक्ट्री है।
मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने बताया कि बहुमंजिला इमारतों या सोसाइटी में लिफ्ट के लिए प्राधिकरण नक्शा पास करता है और निर्माण पूरा होने पर स्थलीय निरीक्षण के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। लिफ्ट की कंपनी और क्षमता का निर्धारण इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी डिपार्टमेंट करता है। इस मामले में लिफ्ट की खराबी और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। हादसे की खबर से परिवार और स्थानीय व्यापारी सदमे में हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लिफ्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।