रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर (मेरठ)। दस हेक्टेयर भूमि में करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर अपने अंतिम चरण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। निर्माण कार्य पूर्ण होते ही अभयारण्य क्षेत्र से मानव आबादी में भटककर आने वाले तेंदुए, भालू और बाघ जैसे वन्यजीवों को यहां सुरक्षित आश्रय मिलेगा। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। वहीं लोगों को भी बाघ, तेंदुआ, भालू आदि वन्यजीवों को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बिजनौर और अमरोहा सहित पांच जिलों में फैले 2073 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य से हर साल कई वन्यजीव आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। ऐसे में, नव निर्मित रेस्क्यू सेंटर इन जीवों को सुरक्षित रखने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रदेश सरकार के निर्देश पर वन विभाग द्वारा वानिकी प्रशिक्षण केंद्र के पास इस सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10 जून 2022 को ऑनलाइन किया था। पिछले तीन वर्षों से चल रहे निर्माण कार्य के जल्द पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग का दावा है कि सेंटर के संचालन में आने से वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी। कार्यदाई संस्था को निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राकृतिक वातावरण और प्रशिक्षित स्टाफ रहेगा
रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप कुल 16 पिंजरे (इनक्लोजर) तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें चार चरणों में विकसित किया जाएगा, ताकि विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों की अलग-अलग देखभाल सुनिश्चित की जा सके। सेंटर में डिप्टी रेंजर, पशु चिकित्सक और अन्य प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती की जाएगी। यहां लाए जाने वाले वन्यजीवों के स्वास्थ्य की नियमित जांच होगी और स्वस्थ पाए जाने पर उन्हें अन्य वन्यजीव अभयारण्यों में छोड़ा जाएगा।
कार्यदाई संस्था को विभाग द्वारा जल्द से जल्द रेस्क्यू सेंटर निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद यहां पर वन्यजीवों को रिस्क पर लाया जाएगा।
खुशबू उपाध्याय, वन क्षेत्राधिकारी हस्तिनापुर
हस्तिनापुर में बन रहा वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर स्रोत विभाग
हस्तिनापुर में बन रहा वन्यजीवों के लिए रेस्क्यू सेंटर स्रोत विभाग