मुजफ्फरनगर में 21 साल से भ्रष्टाचार एवं भू-माफियों के खिलाफ धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी से ‘मन की बात‘ में मेरी भी बात (भूमि घोटाला) शामिल करने की अपील की है। मांग की है कि इसकी सीबीआई द्वारा जांच कराई जाए। उनका आन्दोलन आज 22 वें साल में प्रवेश कर गया है।
अवैध भूमि घोटाले का खुलासा एवं कार्रवाई
मास्टर विजय सिंह ने अपने गांव चैसाना हाल जनपद शामली तत्कालीन मुजफ्फरनगर की 4 हजार बीघा सार्वजनिक भूमि व अन्य सम्पत्ति (अनुमानित कीमत 350 करोड़ रूपये) पर शोध कर जनहित में घोटाले का खुलासा किया है। इस भूमि पर दबंगों व भू-माफियाओं ने राजनीतिक दबाव व भ्रष्टाचार के तहत राजस्व अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत से राजस्व रिकॉर्ड में हेरा-फेरी कर अवैध कब्जा कर रखा है। भूमि-घोटाले की सीबीआई द्वारा जांच व कार्रवाई की मांग को लेकर मास्टर विजय सिंह ने 26 फरवरी 1996 को जिलाधिकारी कार्यालय मुजफ्फरनगर पर धरना शुरू किया था, जो आज 22 वें साल में प्रवेश कर गया हैं। इस बीच कई बार जांच हुईं, जिसमें मास्टर विजय सिंह के आरोप भी सही पाये गये। इसमें 300 बीघा भूमि प्रशासन द्वारा भूमाफियाओं के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई। 3200 बीघा भूमि पर जांच रिपोर्टों में घोटाला साबित हो चुका है तथा 136 मुकदमे भी राजस्व अभिलेखों में हेरा-फेरी के दर्ज हुए। इसके अलावा 81 हजार रुपये दण्ड स्वरूप राजकोष में जमा हुए। राजनीतिक दबाव व भ्रष्टाचार के कारण उक्त प्रकरण में पूर्ण कार्रवाई नहीं हो पाई। जांच रिपोर्टों में विरोधाभास है।
जांच कमेटी हवाई साबित
दिंनाक 30 मार्च 2012 को मुजफ्फरनगर से लखनऊ मुख्यमंत्री निवास तक 19 दिन में 600 किमी की पैदल यात्रा की। 28 अप्रैल 2012 को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने की मांग की। जिस पर मुख्यमंत्री ने एक शासन स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर कार्रवाही के आदेश दिये थे। इसके बाद में अवैध कब्जे के आरोपी पूर्व विधायक ठाकुर जगत सिंह व अन्य आरोपी समाजवादी पार्टी में आ गये थे। राजनीतिक दबाव में जांच कमेटी ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। कार्रवाई हवाई साबित हई व भ्रष्टाचार का शिकार हो गई। कई बार मास्टर विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा किन्तु कोई समय नहीं दिया गया।
एकल व्यक्ति के धरने का बना विश्व रिकॉर्ड
यह 20 साल का धरना सत्याग्रह देश व दुनिया का एकल व्यक्ति का सबसे लम्बा धरना घोषित हो चुका है जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस, इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस, एशिया बुक ऑफ रिकार्डस, मीरा सेल्स ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्डस, यूनिक रिकार्ड ऑफ दी वर्ल्डस ने सबसे लम्बा सत्याग्रह दर्ज किया है। धरना महात्मा गांधी के सत्याग्रह की तर्ज पर अहिंसात्मक है। मुजफ्फरनगर जिला अधिकारी कार्यालय कचहरी के बरामदे में मास्टर विजय सिंह पन्नी लगाकर धरना कुटिया में 24 घंटे गर्मी, सर्दी, बरसात में धरनारत हैं। धरना 21 वर्ष से लगातार चल रहा है।
आन्दोलन क्यों व उद्देश्य ?
महात्मा गांधी, विनोबा भावे व जे.पी. को आदर्श मानकर चलने वाले मास्टर विजय सिंह ने गांव में ही एक भूखे बच्चे की त्रासदी को देखकर अध्यापन-कार्य को इस्तीफा दे दिया। मास्टर विजय सिंह बताते हैं कि 'मैं शाम 4 बजे स्कूल से अपने घर आ रहा था तभी रास्ते में मेरे सामने एक पांच साल का बच्चा तथा उसकी माँ जा रही थी। बच्चा कह रहा था- माँ, कहीं से आटा ले आ। शाम को तू रोटी बना लेना, बहुत भूख लगी है। ये शब्द सुनकर मैं काफी प्रभावित हुआ। हालांकि इससे पहले भी गरीबों के हकों को लुटते हुए मैंने देखा था। वे अपने गाँव में अत्याचार की घटना ज्यादा देखते या सुनते रहते थे। मैं इतना दुखी हुआ कि मैनें अपनी मास्टर की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और अपने गाँव की सार्वजनिक भूमि पर शोध किया। शोध में तथ्य पाये गये कि मेरे गांव में 4575 बीघा जमीन सार्वजनिक थी। जिसमें 4 हजार भूमि पर भू-माफियाओं का अवैध कब्जा है। पूर्व जिलाधिकारी श्री कौशल राज शर्मा व निखिल चन्द्र शुक्ला ने लगभग 50-55 हजार बीघे जमीन से अवैध कब्जा हटवाकर भू-माफियाओं पर कार्रवाई की है। उन्होंने मेरे शोध व आन्दोलन पर मुहर लगा दी कि गाँव शहरों में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे है।