भले ही यूपी में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन और खपत की बात की जाती हो लेकिन कोरोना काल में इन आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं। कोरोना कर्फ्यू के चलते सड़कों पर लगने वाले चाय के ठेले, हलवाइयों की दुकान, होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, मेस, सहालग बंद होने से दूध की खपत में आंशिक गिरावट आई है। हालांकि पराग, अमूल और मदर डेयरी के दूध खरीद का आंकड़ा सामान्य दिनों की भांति है।
पराग डेयरी के जीएम विकास बालियान का कहना है कि वे रोजाना करीब एक लाख लीटर दूध खरीद रहे हैं। मांग घटने से रोजाना करीब 40 हजार लीटर दूध बच रहा है, जिसका पाउडर बनाकर स्टोर किया जा रहा है। दूसरी तरफ भारती मिल्क स्पलैश के निदेशक मनीष भारती का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के चलते बाजार की मांग से बचा दूध डेयरियों पर जाना चाहिए था। ऐसा नहीं हो रहा है। बाजार में मिलने वाले मावा और पनीर के लिए मिल्क पाउडर का इस्तेमाल होता है।
डेयरियों से ज्यादा दूध खरीदते हैं शहरवासी
पैकेट दूध के अलावा शहरवासी बड़ी संख्या में सीधे डेयरियों से दूध खरीदते हैं। नगर निगम के आंकड़ों में शहर में 1500 से ज्यादा अवैध डेयरियां हैं। इनसे हर रोज करीब डेढ़ लाख लीटर दूध की बिक्री की जाती है। इसके अलावा दो लाख लीटर से ज्यादा की खपत पैकेट वाले दूध की होती है।
कहीं सिंथेटिक दूध तो नहीं पी रहे आप
कोरोना की दूसरी लहर में भी मुख्य डेयरियां गांवों से दूध खरीद रही हैं। खरीद के आंकड़ों में ज्यादा अंतर नहीं आया है। बंदी के हालात में खपत होने वाला दूध कहां जा रहा है? अगर यहां खपत होने वाला दूध दिख नहीं रहा तो क्यों न माना जाए कि मांग को पूरा करने के लिए सिंथेटिक दूध का प्रयोग किया जाता है।