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सावधान! दूध के 15 नमूनों में मिला डिटर्जेंट और यूरिया, कोरोना काल में भी बाज नहीं आए मिलावटखोर

Wed, 02 Jun 2021 03:46 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कोरोना काल में भी मिलावटखोर बाज नहीं आए हैं। दूध के लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। 68 में से 23 सैंपल फेल हो गए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
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दूध बेचने जाता दूधवाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दूध में कैल्शियम और जरूरी विटामिन होते हैं लेकिन जो दूध हम खरीद रहे हैं, उसकी शुद्धता की गारंटी नहीं है। मेरठ जिले में दूध का हर तीसरा सैंपल फेल हो रहा है। पिछले एक साल में दूध के 212 सैंपल लिए गए, जिनमें से कोरोना काल के कारण 68 की ही रिपोर्ट आई है। इनमें से 23 सैंपल फेल हो गए। 14 में डिटर्जेंट और यूरिया जैसे हानिकारक पदार्थों की मिलावट निकली है, जबकि नौ में दूध की मलाई या चिकनाहट गायब पाई गई। 

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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिव कुमार ने बताया कि खासकर गर्मी में दूध की आपूर्ति घट जाती है तो मांग पूरी करने के लिए दूध में मिलावट बढ़ जाती है। दूध के जो सैंपल फेल होते हैं, वह मामले एडीएम सिटी की कोर्ट में चलते हैं।

इन मानकों पर परखा जाता है दूध
- क्रीम, (मलाई) जो केवल दूध से न बनी हो और उसमें दुग्ध स्नेह (मिल्क फैट) 40 प्रतिशत से कम न हो
- दूध, जिसमें पानी मिलाया गया हो
- दूध से निकले घी से भिन्न कोई पदार्थ हो
- मथित दूध (मक्खन रहित दूध) शुद्ध के नाम से बेचा जाए
- कृत्रिम मिष्टकर (स्वीटनिंग एजेंट) युक्त पदार्थ मिला हो

घर पर ही करें दूध की जांच
दूध में पानी

दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
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दूध में स्टार्च
टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंदे मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंक्चर आयोडीन दवा दुकान से आसानी से मिल जाती है।

दूध में यूरिया
इसके लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर पांच मिनट के लिए रख दें। इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर अगर पेपर का रंग नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।

दूध में वनस्पति
तीन से पांच मिली दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।

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दूध की खपत घटी तो बनाने लगे मिल्क पाउडर 

भले ही यूपी में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन और खपत की बात की जाती हो लेकिन कोरोना काल में इन आंकड़ों पर सवाल उठने लगे हैं। कोरोना कर्फ्यू के चलते सड़कों पर लगने वाले चाय के ठेले, हलवाइयों की दुकान, होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, मेस, सहालग बंद होने से दूध की खपत में आंशिक गिरावट आई है। हालांकि पराग, अमूल और मदर डेयरी के दूध खरीद का आंकड़ा सामान्य दिनों की भांति है। 

पराग डेयरी के जीएम विकास बालियान का कहना है कि वे रोजाना करीब एक लाख लीटर दूध खरीद रहे हैं। मांग घटने से रोजाना करीब 40 हजार लीटर दूध बच रहा है, जिसका पाउडर बनाकर स्टोर किया जा रहा है। दूसरी तरफ भारती मिल्क स्पलैश के निदेशक मनीष भारती का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू के चलते बाजार की मांग से बचा दूध डेयरियों पर जाना चाहिए था। ऐसा नहीं हो रहा है। बाजार में मिलने वाले मावा और पनीर के लिए मिल्क पाउडर का इस्तेमाल होता है।

डेयरियों से ज्यादा दूध खरीदते हैं शहरवासी
पैकेट दूध के अलावा शहरवासी बड़ी संख्या में सीधे डेयरियों से दूध खरीदते हैं। नगर निगम के आंकड़ों में शहर में 1500 से ज्यादा अवैध डेयरियां हैं। इनसे हर रोज करीब डेढ़ लाख लीटर दूध की बिक्री की जाती है। इसके अलावा दो लाख लीटर से ज्यादा की खपत पैकेट वाले दूध की होती है।

कहीं सिंथेटिक दूध तो नहीं पी रहे आप
कोरोना की दूसरी लहर में भी मुख्य डेयरियां गांवों से दूध खरीद रही हैं। खरीद के आंकड़ों में ज्यादा अंतर नहीं आया है। बंदी के हालात में खपत होने वाला दूध कहां जा रहा है? अगर यहां खपत होने वाला दूध दिख नहीं रहा तो क्यों न माना जाए कि मांग को पूरा करने के लिए सिंथेटिक दूध का प्रयोग किया जाता है।
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