मेरठ। शरीर का कोई अंग भले ही साथ न दे रहा हो, लेकिन हौसला और जुनून दिव्यांगों को आगे बढ़ाने से नहीं रोक पा रहा है। शहर में ऐसे कई दिव्यांग हैं, जो अपनी मेहनत से बुलंदी पर पहुंचे और दूसरों को भी अंधकार से निकालकर उजाले की ओर जाने की प्रेरणा दे रहे हैं। उनके इस जज्बे ने सरकार को भी प्रभावित किया। इसके चलते सरकार उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से नवाज रही है। इस बार विश्व दिव्यांग दिवस पर मेरठ के 69 वर्षीय नेत्रहीन शिक्षक जगदीश लूथरा को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। वह अब तक हजारों लोगों को शिक्षित कर चुके हैं। उनके अलावा मेरठ की माटी ने कई ऐसे खिलाड़ी दिए हैं, जो दिव्यंगता के बावजूद पदकों की झड़ी लगा चुके हैं।
जगदीश लूथरा :
बेगमबाग स्थित रोजमेरी नामक संस्थान चलाने वाले नेत्रहीन जगदीश लूथरा अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान के विशेषज्ञ हैं। दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर जगदीश अभी तक 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दे चुके हैं। इस बार उन्होंने राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए आवेदन किया था। जिसे सरकार ने प्रेरणास्रोत श्रेणी में स्वीकार किया। उन्हें तीन दिसंबर (आज) लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य स्तरीय पुरस्कार देंगे। वह वर्ष 1971 से अध्यापन कर रहे हैं।
गार्गी चौधरी :
रुड़की रोड स्थित विवेक विहार निवासी गार्गी चौधरी मूक-बधिर हैं। वर्ष-2018 में द्रोणाचार्य स्पोर्ट्स डेवलपमेंट सोसाइटी मेरठ में आयोजित 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके बाद दिल्ली स्थित कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में उत्तरी जोन प्रतियोगिता में क्वालीफाई किया। अब वह 20 दिसंबर को भोपाल में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपना भाग्य आजमाएंगी। गार्गी ने बीए प्रथम वर्ष में मदरहुड विवि से प्रथम स्थान भी प्राप्त किया। गार्गी चौधरी ने बताया कि वह निरंतर निशानेबाजी क्षेत्र में मेहनत कर रही हैं।
विनायक बहादुर :
14 साल की उम्र में विनायक राष्ट्रीय स्तर के मूक-बधिर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वर्ष-2017 में राष्ट्रीय खेल दिवस पर 17वें बिहार विकलांग खेल अवार्ड समारोह में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने ‘अजातशत्रु अवार्ड’ से सम्मानित किया था। प्रभातनगर निवासी विनायक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदकों की झड़ी लगा चुके हैं। वह दो स्वर्ण और दो रजत सहित कुल चार राष्ट्रीय पदक अपने नाम कर चुके हैं। वहीं, राज्य स्तर पर आठ स्वर्ण, छह रजत और दो कांस्य जीत चुके हैं।
विवेक चिकारा :
तीरंदाजी में मेरठ का प्रतिनिधित्व कर रहे विवेक चिकारा नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हैं। एक जनवरी-2017 में हुए सड़क हादसे में अपना एक पैर खो देने वाले विवेक का हौसला डगमगाया नहीं। हाल ही में उन्होंने नीदरलैंड में आयोजित हुई पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। इसके चलते उन्हें वर्ष-2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के लिए पैरा तीरंदाजी में कोटा मिल गया है। उन्होंने तीरंदाजी की शुरुआत गुरुकुल प्रभात आश्रम से की। इसके बाद सत्यकाम आर्चरी ट्रेनिंग एकेेडमी पहुंचे। हालांकि, वह अब कोच सत्यदेव प्रसाद और उद्घम सिंह के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग कर रहे हैं।