आनुवांशिक भी होती है बीमारी
ये बीमारी आनुवांशिक भी होती है। कई बार मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन या कुछ ऐसी घटनाएं और अपर्याप्त सामाजिक सहायता भी इस बीमारी का कारण बन सकती है। कोई गहरा सदमा या सिर में चोट भी वजह हो सकती है। जब भी आप अपने मिजाज में उतार-चढ़ाव महसूस करें, बिना लापरवाही बरते इसकी जांच कराएं या फिर फैसला न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
ऐसे करें बचाव
- मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए
- नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए
- इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है
- दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसिलिंग भी जरूरी
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मिजाज में बदलाव महज तनाव नहीं
मनोचिकित्सक डॉ. तरुण पाल बताते हैं कि व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है। यह ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ के लक्षण हो सकते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर को मूड डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के मामले हर रोज ओपीडी में आते हैं।
हर 100 में एक व्यक्ति चपेट में
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक हर 100 में से एक व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित है। कार्यस्थल, समाज या परिवार में किसी व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से आए बदलाव को जानना और समझना बहुत ही आवश्यक है। इससे निपटने के लिए तनाव के प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।