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विश्व बाइपोलर डिसऑर्डर दिवस : बार-बार आए आत्महत्या का विचार, तो ये है मानसिक विकार 

Wed, 30 Mar 2022 05:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

द्विध्रुवी विकार के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 30 मार्च को विश्व बाइपोलर दिवस मनाया जाता है। जब भी आप अपने मिजाज में उतार-चढ़ाव महसूस करें, बिना लापरवाही बरते इसकी जांच कराएं या फिर फैसला न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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विश्व बाइपोलर डिसऑर्डर दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अगर आपके मिजाज में अचानक बदलाव आ जाता है, अचानक खुश और दूसरे ही पल दुखी हो जाते हैं और बार-बार आत्महत्या ख्याल आता है तो सावधान हो जाएं। दरअसल, आप बाइपोलर डिसऑर्डर (द्विध्रुवी विकार) के शिकार हो सकते हैं। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 30 मार्च को विश्व बाइपोलर दिवस मनाया जाता है। 

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केस -1
जागृति विहार के मनोज (23) कभी इतने हिंसक हो जाते थे कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। कभी एकदम शांत हो जाते थे, किसी भी बात का जवाब ही नहीं देते थे। कई बार बिना किसी कारण के रोने लग जाते थे और खुद को कमरे में बंद कर लेते थे। परिवार वाले भूतप्रेत का साया समझ रहे थे, मेडिकल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो पता चला बाइपोलर डिसऑर्डर है। इलाज चल रहा है। 

केस -2
लिसाड़ी गेट के राशिद (47) कभी लंबे समय तक उदास हो जाते थे, बहुत गुस्सा करते थे, नींद की जरूरत महसूस न होती थी। कभी जरूरत से ज्यादा बातें करते थे। परिवार ने उन्हें जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो बाइपोलर डिसऑर्डर बीमारी का पता चला। इलाज चला, वह अब ठीक हैं।
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आनुवांशिक भी होती है बीमारी
ये बीमारी आनुवांशिक भी होती है। कई बार मस्तिष्क में रसायनों का असंतुलन या कुछ ऐसी घटनाएं और अपर्याप्त सामाजिक सहायता भी इस बीमारी का कारण बन सकती है। कोई गहरा सदमा या सिर में चोट भी वजह हो सकती है। जब भी आप अपने मिजाज में उतार-चढ़ाव महसूस करें, बिना लापरवाही बरते इसकी जांच कराएं या फिर फैसला न कर पाने की स्थिति में डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

ऐसे करें बचाव
  • मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए 
  • नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए 
  • इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है
  • दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसिलिंग भी जरूरी 
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मिजाज में बदलाव महज तनाव नहीं 
मनोचिकित्सक डॉ. तरुण पाल बताते हैं कि व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है। यह ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ के लक्षण हो सकते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर को मूड डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। इस तरह के मामले हर रोज ओपीडी में आते हैं। 

हर 100 में एक व्यक्ति चपेट में 
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक हर 100 में से एक व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित है। कार्यस्थल, समाज या परिवार में किसी व्यक्ति के व्यवहार में तेजी से आए बदलाव को जानना और समझना बहुत ही आवश्यक है। इससे निपटने के लिए तनाव के प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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