पढ़ाई से ही शुरू हो गया था विरोध
शालिनी बताती हैं कि उसके पिता को काफी समय से कम दिखाई देता था। जिस कारण दुकान भी ठीक से नहीं चल पाती थी। वह खुद दुकान पर उनका हाथ बंटाती थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थी, फिर भी हौसला पूरा दिया। लेकिन उसके आगे बढ़ते कदमों को रोकने का प्रयास पढ़ाई के समय ही शुरू हो गया था। परिवार की हालत देख, आसपास के एवं गांव के लोग पापा से कहते थे कि पढ़ाई पर खर्च कम कर, लड़की जितना पढ़ ली बहुत है। लेकिन पिता ने उसे पढ़ने से कभी नहीं रोका, मां ने उसे प्रेरित किया। जब वह आईटीआई में प्रवेश ले रही थी, तब भी लोगों ने उसके लिए काफी बातें कीं। कहा कि कहां नौकरी करने जाना है। लेकिन उसने परिवार के काम में भी हाथ बंटाया और तकनीकी शिक्षा भी ली।
2016 में हुआ चयन, मालगाड़ी चलाने से की शुरुआत
शालिनी का रेलवे में सहायक लोको पायलट के रूप में अगस्त 2016 में चयन हुआ और 28 मार्च 2017 को पहली तैनाती मुरादाबाद में मिली। जहां लोको पायलट के साथ सहायक लोको पायलट के रूप में मालगाड़ी चलाने से शुरुआत की। लगभग तीन माह उसने रेल के इंजन की कमान संभाली। उसके बाद सहारनपुर में एक माह तक मालगाड़ी पर चली। लेकिन महिला पायलट की कमी के चलते उसे लोको लॉबी में इंतजार में रखा गया है।
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