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Women's day 2019: मुसीबतों का मुकाबला कर लिख दी सफलता की इबारत

Fri, 08 Mar 2019 01:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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सहारनपुर की शालिनी - फोटो : अमर उजाला
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तंगहाली और विपरीत परिस्थितियां, न सिर्फ आस पड़ोस और गांव के लोग, बल्कि रिश्तेदार तक बेटी के घर से बाहर कदम निकालने में बाधा बन रहे थे। हर किसी ने रोका, लेकिन मां और पिता ने साथ दिया तो फिर सफलता की ऐसी कहानी रच दी कि न सिर्फ गांव के लिए, बल्कि आसपास के इलाके के लिए वह मिसाल बन गईं।  

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यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि सहारनपुर के एक छोटे से गांव इस्माइलपुर की रहने वाली 23 वर्षीय शालिनी की दास्तां है जिसने रेलवे में सहायक लोको पायलट जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य को चुना। न सिर्फ मालगाड़ी चलाई, बल्कि सवारी गाड़ी चलाने के लिए अपनी दावेदारी पेश की। इस्माइलपुर गांव की एकमात्र ऐसी महिला बनी, जो सरकारी नौकरी में पहुंचीं। 

इस्माइलपुर के रहने वाले दंपति फग्गू सिंह और बालेश देवी के परिवार में पैदा हुई शालिनी को बचपन से ही तंगी का सामना करना पड़ा। परिवार के गुजारे के लिए पिता ने परचून की छोटी सी दुकान कर ली। शालिनी अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। दो छोटे भाई हैं। दुकान से इतनी आय नहीं थी कि पढ़ाई के बढ़ते खर्चे उठा पाते। 
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पढ़ाई के खर्चे पूरे करने के लिए घर में गाय पालन किया। गायों का काम खुद शालिनी ही करती थी। इससे वह ओर उसके भाई विशाल और राहुल की पढ़ाई का खर्च निकलने लगा। मुश्किल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसके बाद आईटीआई में फिटर ट्रेड में प्रवेश लिया। जहां से तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा मिली। लोको निरीक्षक रामप्रीत सिंह ने बताया कि शालिनी के साथ मीनू यादव भी सहारनपुर में सहायक लोको पायलट के रूप में तैनात है।

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पढ़ाई से ही शुरू हो गया था विरोध 
शालिनी बताती हैं कि उसके पिता को काफी समय से कम दिखाई देता था। जिस कारण दुकान भी ठीक से नहीं चल पाती थी। वह खुद दुकान पर उनका हाथ बंटाती थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थी, फिर भी हौसला पूरा दिया। लेकिन उसके आगे बढ़ते कदमों को रोकने का प्रयास पढ़ाई के समय ही शुरू हो गया था। परिवार की हालत देख, आसपास के एवं गांव के लोग पापा से कहते थे कि पढ़ाई पर खर्च कम कर, लड़की जितना पढ़ ली बहुत है। लेकिन पिता ने उसे पढ़ने से कभी नहीं रोका, मां ने उसे प्रेरित किया। जब वह आईटीआई में प्रवेश ले रही थी, तब भी लोगों ने उसके लिए काफी बातें कीं। कहा कि कहां नौकरी करने जाना है। लेकिन उसने परिवार के काम में भी हाथ बंटाया और तकनीकी शिक्षा भी ली। 

2016 में हुआ चयन, मालगाड़ी चलाने से की शुरुआत 
शालिनी का रेलवे में सहायक लोको पायलट के रूप में अगस्त 2016 में चयन हुआ और 28 मार्च 2017 को पहली तैनाती मुरादाबाद में मिली। जहां लोको पायलट के साथ सहायक लोको पायलट के रूप में मालगाड़ी चलाने से शुरुआत की। लगभग तीन माह उसने रेल के इंजन की कमान संभाली। उसके बाद सहारनपुर में एक माह तक मालगाड़ी पर चली। लेकिन महिला पायलट की कमी के चलते उसे लोको लॉबी में इंतजार में रखा गया है।

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