छोटे लोगों पर कार्रवाई का आरोप
धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि उनके मकान अल्प और दुर्बल आय वर्ग के हैं। इन मकानों में छोटी दुकानें चलाकर ही उनका जीवनयापन होता था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्होंने घरों में चल रही दुकानों को बंद भी कर दिया है।
इसके बावजूद आवास एवं विकास परिषद के अधिकारी सैट बैक छोड़ने के नाम पर उन्हें लगातार दबाव में ले रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके मकान पिलर पर नहीं बने हैं और चार इंच की दीवारों पर खड़े हैं। ऐसे में हल्का प्रहार भी मकानों को गिरा सकता है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में उच्च आय वर्ग के कई भवनों में बड़े प्रतिष्ठान, बैंक, सैलून और अन्य व्यापार चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई छोटे लोगों पर ही की जा रही है।
अपने घरों पर नहीं चलने देंगे बुलडोजर
धरनास्थल पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि कुछ व्यापारियों की शिकायत के कारण उनका टेंट हटवाया गया, लेकिन इससे उनके हौसले कमजोर नहीं होंगे। उनका कहना है कि यदि नियमों के विरुद्ध चल रहे बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन अपने घरों पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे।
भजन-कीर्तन कर किया हनुमान चालीसा का पाठ
गोल मंदिर के पास सेक्टर तीन और चार के चौराहे पर भी महिलाओं ने धरना दिया। यहां महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपने घरों को बचाने की प्रार्थना की।
शाम को महिलाएं कैंट विधायक अमित अग्रवाल से भी मिलीं और अपनी समस्याएं बताईं। महिलाओं के अनुसार विधायक ने अधिकारियों से फोन पर पूछा कि जब मूल नक्शे ही उपलब्ध नहीं हैं तो मानचित्र कैसे तैयार किए गए। विधायक ने मामले में सहयोग का आश्वासन दिया। हालांकि कुछ महिलाओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से लगातार आश्वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके पक्ष में कोई ठोस कदम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।