गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर निर्माण के लिए जमीन लेने को लेकर धरने पर बैठे किसानों के बीच पहुंचे अफसर
एडीएम ने विकास की बात कहकर जमीन देने की अपील की
किसानों ने कहा कॉरिडोर से पूंजीपतियों का होगा विकास किसानों का नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। 19 माह से धरने पर बैठे किसानों से मिलने पहुंचे एडीएम प्रशासन ने गंगा एक्सप्रेसवे के साथ कॉरिडोर के निर्माण के लिए किसानों से जमीन की मांग की। किसानों से साफ कहा कि इस कॉरिडोर से केवल पूंजी पतियों का विकास होगा, किसानों का नहीं। उनका तो केवल विनाश ही होगा। किसानों ने कॉरिडोर के दूसरे फेस के लिए अपनी कृषि भूमि देने से इन्कार करते हुए जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ होने व औद्योगिक कॉरिडोर के पहले फेस का सीमांकन होने पर अधिकारी जल्द से जल्द दूसरे फेस के लिए 294 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदने की तैयारी में लगे हैं। शनिवार को एडीएम प्रशासन सत्य प्रकाश, एसडीएम सदर दीपक माथुर धरने पर पहुंचे। उन्होंने संघर्ष समिति के अध्यक्ष चौपाल सिंह किसानों से वार्ता की। एडीएम प्रशासन ने किसानों से कहा कि सरकार विकास कर रही है तो उसमें किसानों को सहयोग करना चाहिए।
किसानों ने बताया कि पहले ही गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए बिना विरोध के अपनी कृषि भूमि दे दी। अब इन तीन गांव के 800 किसानों में से 70 प्रतिशत किसान ऐसे बचे हैं जिन पर केवल एक से डेढ़ एकड़ कृषि भूमि ही बची है। यह भूमि बहुत उपजाऊ है, इसी कृषि भूमि से 800 किसानों का परिवार चलता है। एडीएम प्रशासन ने किसानों से सर्किल रेट व मार्केट रेट के बारे में भी पूछा। किसानों ने एकजुट होकर बताया कि दूसरे फेस के लिए कोई भी किसान अपनी कृषि भूमि देने के लिए सहमत नहीं है। बाद में एडीएम प्रशासन ने किसानों के बीच बैठकर धरना स्थल की चाय भी पी। इस मौके पर मांगेराम, राजकुमार नागर, संतरपाल, बृजपाल प्रधान खड़खड़ी, महेश त्यागी नीरज त्यागी सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।