सरधना। ऐतिहासिक मेला बूढ़ा बाबू में शुक्रवार रात अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दराज से आए कवियों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं की वाह वाही लूटी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक ठा. संगीत सोम, भाजपा जिलाध्यक्ष ठा. शिवकुमार राणा व विमल शर्मा ने फीता काटकर शुभारंभ किया।
मेला बूढ़ा बाबू में आयोजित कवि सम्मेलन के शुभारंभ में प्रख्यात कवियित्री मुमताज नसीम ने मां सरस्वती वंदना के साथ किया। इसके बाद कवि सम्मेलन में प्रसिद्ध कवियों व कवयित्रियों ने हास्य-व्यंग व काव्य रचनाओं से समां बांधा। बीच-बीच में उन्होंने क्षेत्र की ठेठ-देहाती शैली पर भी व्यंग्य सुनाकर दर्शकों को लोटपोट कर दिया। जबकि वीर रस की कविताओं को सुनाकर देशभक्ति का रस भी सदन में घोल दिया
उन्नाव से पहुंचे युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव ने सुनाया कि Òमुझको न रोकिए, न जाने दीजिए। मेरा सफर अलग है, मुझे जाने दीजिए। ज्यादा से ज्यादा होगा, ये कि हार जाएंगे। किस्मत तो हमें अपनी आजमाने दीजिए।Ó युवा कवि की कविता सुन वहां मौजूद युवाओं ने जमकर तालियां बजाईं। इस दौरान राजस्थान के धौलपुर से आए कवि रामबाबू सिकरवार ने सुनाया कि Òजो वतन के खातिर मिटे उनको सलाम है। जाबांज सैनिकों को कोटिश प्रणाम है। आतंकियों के घर में घुसके मारकर। दुनिया को बता दिया ये हिंदुस्तान है।Ó
वहीं, देवास मध्यप्रदेश से पधारे कवि शशिकांत यादव शशि ने काव्यपाठ करते हुए पढ़ा, Òतोला से मन भर तोला दे। पारा पानी में घोला दे। सब कीड़े बाहर निकले। चुटकी भर तो सच बोला दे।Ó मेरठ की युवा कवियत्री डॉ. शुभम त्यागी ने सुनाया कि Òचांद को तन्हा तकने लगी आजकल। कहती मां है सयानी हुई आजकल। सामने बैठ दर्पण के इठलाके मैं। बात खुद से ही करने लगी आजकल।Ó
इसके बाद जबलपुर मध्यप्रदेश से आई लोकप्रिय युवा कवियत्री मणिका दुबे ने सुनाया कि Òशहर के शोर में वीरानियां हैं। यहां तुम हो मगर तन्हाइयां हैं। वहीं, पर बैठ के अरसा गुजारूं। जहां तेरी मेरी परछाइयां हैं।Ó मणिका के काव्यपाठ सुनकर सदन में मौजूद लोगों ने खूब तालियां बजाई। प्रख्यात कवि सर्वेश अस्थाना ने पढ़ा कि Òरिश्तों में तकरार बहुत है। लेकिन, इसमें प्यार बहुत है। सारी दुनिया खुश रखने को। बस अपना परिवार बहुत है।Ó उनकी कविताओं को सुनकर सदन में वाह वाह की आवाज गूंज गई।
वीर रस के कवि आशीष अनल ने पढ़ा Òलिपट तिरंगे में वो जब घर आया। सबकी आंख नम गला सा भर आया था। सर रख गोद मे रख माता दुलारने लगी। माथा चूम-चूम दुलारने लगी। मातृभूमि के दुलारा वो अनन्य हो गया। बाप बोला ऐसा बेटा पा मैं धन्य हो गया।Ó देश विदेश में हरियाणा के हास्य कवि अनिल अग्रवंशी ने हास्य रस सुनाकर सदन को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने पढ़ा कि Òचेहरे पे हंसी, दिलों में खुशी होती है। सही मायने में यही जिंदगी होती है। हंसना किसी इबादत से कम नहीं। किसी और को हंसा दो तो बंदगी होती है।Ó
देर रात तक चले अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में श्रोताओं ने सभी कवियों की हौसलाफजाई की। विख्यात कवियत्री मुमताज नसीम ने युवाओं की नब्ज टटोलते हुए पढ़ा आज इकरार कर लिया हमने। खुद को बीमार कर लिया हमने। अब तो लगता है जान जाएगी। तुमसे जो प्यार कर लिया हमने। उन्होंने श्रृंगार की कविताओं पर युवाओं से खूब तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन का संचालन शशिकांत यादव ने किया। इस दौरान सूर्यदेव त्यागी, निजाम अंसारी, ठा. प्रीतीश, आलोक जैन, विनोद जैन, विरेन्द्र चौधरी, ललित गुप्ता, सुशील कुमार, शाहवेज अंसारी, शानू जैन, पंकज टाली, अंजलि, तारिक हसन, इमरान ठाकुर, राहुल पाल आदि मौजूद रहे।
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अशोभनीय कार्यक्रम बदार्शत नहीं
सरधना। कवि सम्मेलन कार्यक्रम के शुभारंभ पर पूर्व विधायक ठा. संगीत सोम ने कहा कि रामलीला मंच पर अश्लील प्रस्तुति व अशोभनीय आयोजन को बर्दाशत नहीं किया जाएगा। इसको लेकर उन्होंने आयोजकों व नगर के गणमान्य लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें इस ऐतिहासिक मेले में आपसी सद्भाव व संस्कारों का परिचय देना चाहिए।