हिंदी के विकास से ही देश का विकास होगा। इसे हीन भावना से देखने वाले लोगों को केदारनाथ, निदा फ़ाजली, नरेश सक्सेना, अज्ञेय, दुष्यंत कुमार जैसे कवियों को पढ़ने की जरूरत है। विकसित देशों ने राष्ट्रीय भाषा को अपनाया और पढ़ाया है। कहा यदि हम भी विकास करना चाहते हैं तो अंग्रेजी भाषा पर अपनी निर्भरता को कम करें और हिंदी भाषा का यथासंभव प्रचार-प्रसार करें।
हिंदी के प्रयोग के साथ प्रगति करेगा विज्ञान
किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का विशेष स्थान होता है। भारत प्राचीन काल में भी ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र रहा है। प्राचीन काल में ऋषि मुनियों ने जो कीर्तिमान स्थापित किए, उनका माध्यम तत्कालीन भारतीय भाषाएं हैं। यह कहना है कृषि विवि के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर का।
वह कहते हैं कि वैज्ञानिक गतिविधियों और उपलब्धियों कि अधिक से अधिक जानकारी सभी लोगों को हिंदी में देने का प्रयास करना होगा। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नित्य नए परिवर्तन हो रहे हैं। इस क्षेत्र में हिंदी में भी काफी अच्छा कदम बढ़ाए हैं और आज सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से हिंदी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है।
अधिकांश वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं द्वारा हिंदी के माध्यम से पत्र-पत्रिकाओं एवं शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जा रहा है। इससे अधिक पाठकों और दर्शकों तक उपयोगी सामग्री पहुंच रही है। इसके साथ ही हिंदी को बढ़ावा मिला है। मूल लेखक या वैज्ञानिक जिस भाषा में सर्वप्रथम अपना साहित्य लिखता है, वहीं लेखन प्रमाणिक माना जाता है, जिस पर समस्त अनुवाद आश्रित होता है।