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हिंदी हैं हम : मां के माथे पर रोशन एक बिंदी है, गर्व करो पहचान हमारी हिंदी है

Wed, 08 Sep 2021 04:27 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

युवा शायर अजहर इकबाल बताते हैं कि युवाओं के देश के कवियों शायरों के बारे में उनकी राष्ट्रीय भाष में लिखी किताबों को पढ़ना चाहिए। राष्ट्रीय भाषा विभिन्न जातियों, जनजातियों और क्षेत्रों के लोगों को एक साथ बांधती है। यह किसी भी देश के लिए सम्मान का सूचक होती है। हिंदी भी देश की महानता और राष्ट्र की पहचान का प्रतीक है।
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कृषि विवि के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर व युवा शायर अजहर इकबाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मां के माथे पर रोशन एक बिंदी है, गर्व करो पहचान हमारी हिंदी है। गोपाल दास नीरज, निदा फ़ाजली, बेकल उत्साही, गुलजार जैसे बड़े शायरों के साथ मंच साझा कर चुके मेरठ के युवा शायर अजहर इकबाल ने इन चंद पंक्तियों के साथ हिंदी की महत्ता बताई...
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विकसित देशों ने राष्ट्रीय भाषा को अपनाया, पढ़ाया 
हिंदी और उर्दू भाषाओं की लिपि भले ही अलग हो, लेकिन दोनों का उद्देश्य हमारी साझी विरासत को कायम रखना है। युवा शायर अजहर इकबाल बताते हैं कि हिंदी भाषा के महान कवियों में हजरत अमीर ख़ुसरो, मलिक मोहम्मद जायसी और कबीर का नाम भी लिया जाता है तो वहीं उर्दू के बड़े नामों में रघुपति सहाय फ़िराक गोरखपुरी, आनंद नारायण मुल्ला और पंडित ब्रज नारायण सहित अन्य मौजूद हैं। इन सभी के बारे में युवाओं को पढ़ना चाहिए।

इकबाल कहते हैं कि राष्ट्रीय भाषा विभिन्न जातियों, जनजातियों और क्षेत्रों के लोगों को एक साथ बांधती है। यह किसी भी देश के लिए सम्मान का सूचक होती है। हिंदी भी देश की महानता और राष्ट्र की पहचान का प्रतीक है।
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हिंदी के विकास से ही देश का विकास होगा। इसे हीन भावना से देखने वाले लोगों को केदारनाथ, निदा फ़ाजली, नरेश सक्सेना, अज्ञेय, दुष्यंत कुमार जैसे कवियों को पढ़ने की जरूरत है। विकसित देशों ने राष्ट्रीय भाषा को अपनाया और पढ़ाया है। कहा यदि हम भी विकास करना चाहते हैं तो अंग्रेजी भाषा पर अपनी निर्भरता को कम करें और हिंदी भाषा का यथासंभव प्रचार-प्रसार करें। 

हिंदी के प्रयोग के साथ प्रगति करेगा विज्ञान
किसी भी राष्ट्र के समग्र विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई प्रगति का विशेष स्थान होता है। भारत प्राचीन काल में भी ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र रहा है। प्राचीन काल में ऋषि मुनियों ने जो कीर्तिमान स्थापित किए, उनका माध्यम तत्कालीन भारतीय भाषाएं हैं। यह कहना है कृषि विवि के वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर का। 

 वह कहते हैं कि वैज्ञानिक गतिविधियों और उपलब्धियों कि अधिक से अधिक जानकारी सभी लोगों को हिंदी में देने का प्रयास करना होगा। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नित्य नए परिवर्तन हो रहे हैं। इस क्षेत्र में हिंदी में भी काफी अच्छा कदम बढ़ाए हैं और आज सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से हिंदी काफी तेजी से आगे बढ़ रही है।

अधिकांश वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं द्वारा हिंदी के माध्यम से पत्र-पत्रिकाओं एवं शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन किया जा रहा है। इससे अधिक पाठकों और दर्शकों तक उपयोगी सामग्री पहुंच रही है। इसके साथ ही हिंदी को बढ़ावा मिला है। मूल लेखक या वैज्ञानिक जिस भाषा में सर्वप्रथम अपना साहित्य लिखता है, वहीं लेखन प्रमाणिक माना जाता है, जिस पर समस्त अनुवाद आश्रित होता है।
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