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‘वाह साहब’ के रिकॉर्ड को धोखा देकर 100 करोड़ का खेल

Sat, 09 Apr 2016 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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वक्फ बोर्ड की जमीन। - फोटो : फाइल फोटो
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1930 में कराए गए राजस्व सर्वे एवं दर्ज अभिलेखों का अनुवाद करने में करोड़ों का खेल होगा, शायद ही किसी ने सोचा होगा। मेरठ में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का असली मालिकाना हक तलाशने के लिए किए गए तर्जुमे में एक-दो नहीं, लगभग 100 करोड़ रुपये की संपत्ति में खेल हुआ। कई मामलों में खेवट और खसरा नंबरों का गलत अनुवाद कर वक्फ को सूचना भेज दी गई। नतीजा, वक्फ बोर्ड ने ऐसी संपत्तियों को वक्फ से बाहर कर दिया और इस पर कब्जे हो गए। ऐसे प्रकरणों का खुलासा होने पर अब हड़कंप की स्थिति है। गहनता से अभिलेखों की जांच शुरू कर दी गई है।
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उत्तर प्रदेश में राजस्व रिकार्ड की सत्यता की पुष्टि अभिलेखों में दर्ज 59 फसली रिकार्ड से होती है। यह सारा रिकार्ड उस अफसर के बंदोबस्त पर कराया गया, जिसे वाह साहब नाम दिया गया। ये नक्शे और अभिलेख 1930 में दर्ज कराए गए और आज भी वाह साहब के नाम से ही जाने जाते हैं। यदि वर्तमान में किसी जमीन का वास्तविक रिकार्ड तलाशना हो, तो वाह साहब के अभिलेखों से ही पुष्टि की जाती है। वहीं से पता चलता है कि इस जमीन का मालिकाना हक किसके नाम रहा, सरकार के या किसी अन्य व्यक्ति के। यदि हक बदला तो कब-कब, इसका मिलान उसी से होता है।

उर्दू में हैं ये दस्तावेज
यह दस्तावेज अधिकतर उर्दू में हैं। ऐसे में इस रिकार्ड के अध्ययन के लिए अभिलेखागार में विशेष रूप से अनुवादकों की मदद ली जाती है। अध्ययन के बाद अनुवादक इसका पूरा ब्यौरा पेश करते हैं और हिंदी में इसकी व्याख्या की जाती है।
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अनुवाद में हुआ बड़ा खेल
मेरठ में वक्फ बोर्ड की जमीनाें पर कब्जे हुए हैं। ऐसे कई प्रकरण हैं, जब जमीन को वक्फ बोर्ड ने कह दिया कि यह खेवट और खसरा नंबर वक्फ के नहीं हैं। दरअसल बोर्ड ने तहसील की रिपोर्ट के आधार पर इन नंबरों को मुक्त किया, क्योंकि तहसील ने ही इन नंबरों का गलत अनुवाद कर भेज दिया था। हाल ही में अब्दुल्लापुर में 50 करोड़ रुपये की जमीन को वक्फ बोर्ड ने ऐसे ही मुक्त किया। जांच में सामने आ गया है कि राजस्व टीम ने अनुवाद भी गलत किया और अभिलेखागार में खेल हुआ। इस मामले में लेखपाल को सस्पेंड कर दिया गया है।

सरधना रोड की एक प्रॉपर्टी में भी तहसील की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। यहां कथित मुतवल्ली ने शिया वक्फ बोर्ड का एक फर्जी लेटर बनाया, जिसमें कहा गया कि इस संपत्ति को बेचकर दूसरी जगह संपत्ति ले ली जाए। इसकी पुष्टि नहीं की गई और वहां धुआंधार ढंग से इस संपत्ति को बेच दिया गया। अन्य ऐसी कई संपत्तियां हैं, जहां रिकार्ड में हेराफेरी सामने आ रही है।

ताबड़तोड़ ढंग से निर्माण शुरू
वक्फ की इन संपत्तियों पर ताबड़तोड़ ढंग से निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। अब्दुल्लापुर में डीएम ने जांच एडीएम प्रशासन को सौंप दी है, पर अभी वक्फ बोर्ड को यह इत्तला नहीं भेजी है कि तहसील रिपोर्ट त्रुटिपूर्ण थी। इसका लाभ उठाकर मौके पर तेजी से निर्माण हो रहा है। सरधना रोड पर वक्फ की यह जमीन लगभग साढ़े तीन हेक्टेयर है, जबकि अब मौके पर पाई गई है मात्र 1.6 हेक्टेयर। सहायक सर्वे आयुक्त ने इसकी रिपोर्ट वक्फ बोर्ड एवं शासन दोनों को भेज दी है।

समझिये ‘वाह साहब’ को
अंग्रेजों ने वर्ष-1930 में जमीन की पैमाइश और बंदोबस्त के बाद कपड़े पर जो नक्शे तैयार किए थे, उनको ‘वाह साहब’ नाम दिया था। वर्ष-1947 में भारत से जाते समय अंग्रेज अपने सिजरे यहीं दे गए थे। तब से देश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन अंग्रेजों की तरह अपनी जमीन के रिकॉर्ड नहीं तैयार करा सकीं। मुसीबत यह भी है कि ‘वाह साहब’ में जो भी उल्लेख है, वह अधिकतर उर्दू में है। इसी का फायदा उठाते हुए अनुवाद में हेराफेरी कर जमीन घोटाला कर दिया गया है।
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