आदि गुरू शंकराचार्य आश्रम मे चल रही रामकथा में आरती करते ग्रामीण। स्त्रोत:- संवाद
कथावाचक ने महर्षि विश्वामित्र के द्वारा यज्ञ रक्षा के लिए राजा दशरथ के पास श्रीराम-लक्षमण की मांग करने वाला वर्णन सुनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
मुंडाली। नंगलामल स्थित आदि गुरु शंकराचार्य गुरुकुल आश्रम में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामकथा के चौथे दिन शुक्रवार को वाचक मुकेश महाराज ने भक्तों को महर्षि विश्वामित्र द्वारा यज्ञ रक्षा के लिए राजा दशरथ के पास श्रीराम-लक्षमण की मांग करने वाला वर्णन सुनाया। उन्होंने भक्तों को बताया कि श्रीराम को विश्वामित्र अपने यज्ञ की रक्षा के लिए राक्षसों (ताड़का, मारीच आदि) को रोकने के लिए राजा दशरथ के पास गए और उनसे अपने प्राणों से प्यारे पुत्र राम-लक्ष्मण को मांगा। दशरथ पहले तो विचलित हुए, पर वचनबद्धता के कारण उन्हें राम-लक्ष्मण को सौंपना पड़ा। विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को लेकर वन की ओर प्रस्थान कर गए। उन्होंने उन्हें विभिन्न प्रकार की विद्या सिखाई और कई राक्षसों का वध कराया। जिससे राम-लक्ष्मण शक्तिशाली बने और दोनों भाइयों ने राक्षसों से यज्ञ व ऋषि मुनियों की रक्षा करके अपने पिता का मान बढ़ाया।
आश्रम संस्थापक स्वामी दीपक ज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को राम-लक्ष्मण से प्रेरणा लेते हुए अपने माता-पिता के लिए आज्ञाकारी और आदर्शवादी संतान बनना चाहिए। इस दौरान श्रीओम तोमर, गजेंद्र सिंह, दिव्या तोमर, देव तोमर, भावना सैनी, भाजपा नेता सुमित राणा, अशोक तोमर, धर्मेंद्र खटाना, कृष्ण तोमर, नरेश गोयल, सूबे सिंह, बॉबी शर्मा, महावीर तोमर, सुरेंद्र तोमर आदि मौजूद रहे।