हस्तिनापुर। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र में बारिश के कारण रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 1.21 लाख क्यूसेक पर पहुंचने से खादर क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई। परंतु शाम तक गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
बरसात के अगले तीन महीने खादर क्षेत्र के लोगों के लिए काफी चिंता भरे होते हैं। क्योंकि इन्हीं दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र में बाढ़ आती है। करीब 20 दिन पूर्व गंगा का जलस्तर बढ़ गया था, परंतु उसके बाद सामान्य स्थिति में चल रहा था। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार पिछले दो दिनों में हुई बारिश के कारण रविवार की सुबह अचानक गंगा का जलस्तर 20 हजार क्यूसेक से बढ़कर 1.21 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। इससे खादर क्षेत्र के लोग चिंतित हो गए। उन्हें डर सता रहा था कि कहीं गंगा का जलस्तर और अधिक न बढ़ जाए। क्योंकि गंगा नदी कभी भी उफान पर आकर खादर क्षेत्र में तबाही मचा सकती है।
गंगा का जल स्तर अचानक बढ़ने से पानी किनारों से टकराने लगा, जिसे देखने के लिए खादर क्षेत्र के लोग गंगा घाट पर पहुंचे। वहीं जल स्तर बढ़ने की सूचना पर सिंचाई विभाग और तहसील प्रशासन भी अलर्ट हो गया। परंतु दोपहर के बाद धीरे-धीरे गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। जल स्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही एसडीएम अंकित कुमार ने बाढ़ चौकियों पर तैनात लेखपालों को गंगा के जल स्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए।
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार बताया कि रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 1.21 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। जो शाम 5:00 बजे घटकर 80 हजार क्यूसेक रह गया। वहीं, हरिद्वार से भी गंगा के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। जहां से 50 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज है। जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि बिजनौर बैराज पर अभी जलस्तर घटेगा।