मेरठ। नगर निगम के गांवड़ी स्थित डंपिंग ग्राउंड में कूड़े को गड्ढों में दफन करने का मामला तूल पकड़ रहा है। एक तरफ जहां ग्रामीण लामबंद हो रहे हैं। वहीं, नगर निगम के दावों की भी पोल खुल रही है। यह मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है इसके बावजूद नगर निगम सुधरने के लिए तैयार नहीं है।
गांवड़ी में नगर निगम द्वारा 70 लाख रुपये की लागत से बेलेस्टिक सेपरेटर प्लांट लगाया गया था। इस प्लांट पर नगर निगम प्रतिमाह 4.42 लाख रुपये खर्च कर रहा है। यहां पर कूड़ा अलग-अलग करने के बजाए उसे गहरे गड्ढे खोदकर दबाया जा रहा है। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में इसका खुलासा किया। इस पर आसपास के ग्रामीणों ने आंदोलन की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है।
नहीं दिया गया खाद
नगर निगम का दावा है कि गांवड़ी के डंपिंग ग्राउंड में कूड़े से खाद बनाकर किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है। उधर, किसानों ने इस दावे को सिरे से नकार दिया। आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर खाद नहीं बनाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लांट के नाम पर जो खर्च दर्शाया जा रहा है, उसकी नगर निगम अधिकारी बंदरबांट कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत
गांवड़ी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर शहर से आने वाले बदबूदार कूडे़ का ढेर प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह संक्रामक रोगों की रफ्तार बढ़ाने में मददगार हो सकता है। गांवड़ी निवासी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति ने भी कूड़ा दबाए जाने की कई बार शिकायत नगरायुक्त से की थी। इससे गांवड़ी एवं मेदपुर समेत आसपास के गांवों का भूजल इस कदर दूषित हो चुका है कि जलजनित रोग होने लगे हैं। वहीं, लोकेश प्रजापति ने चेताया कि वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
कचरे में खतरनाक बायो मेडिकल वेस्ट
गांवड़ी निवासी सुनील गावड़ी का कहना है कि उनके खेत प्लांट के समीप हैं। वहां सिर्फ कंकर, पत्थर, पॉलिथीन व बारीक मिट्टी होती है। उन्होंने बताया कि वह खेतों की सिंचाई करने जाते हैं तो कई बार कूडे़ के ढेर से आवारा कुत्ते बदबूदार मेडिकल बायो वेस्ट एवं कटे-फटे मानव अंगों को खींचते दिखाई देते हैं।
जमीन तो ले ली, रोजगार नहीं दिया
गांवड़ी निवासी कर्मवीर ने बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने भूअधिग्रहण से पहलेे किसानों को लुभावने सपने दिखाए थे। उन्होंने गांव की तरक्की एवं नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था। अब किसान ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्हें सुविधाओं के बदले मक्खी, मच्छर, बदबू एवं संक्रामक रोग मिल रहे हैं।
नहीं मिला कंपोस्ट खाद
किसान विक्रम सिंह का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि नगर निगम अधिकारी कब कंपोस्ट खाद उपलब्ध कराएंगे। हालांकि नगर निगम द्वारा लगाए गए कूड़ा निस्तारण प्लांट पर आवारा कुत्ते रहते हैं। वे ग्रामीणों पर हमला करने के लिए दौड़ते हैं। वहीं, कूड़े से निकलने वाले ईंट-पत्थरों को चोरी छिपे बेचा जा रहा है।
मिट्टी का अवैध खनन जारी
ग्रामीणों का आरोप है कि गहरे गड्ढे खोदकर उनमें कूड़ा भरकर ऊपर से मिट्टी डाल दी जाती है। बाकी की मिट्टी को डंपरों में भरकर बेच दिया जाता है। ऐसे में ठेकेदार निगम अधिकारियों की साठगांठ से अवैध खनन जारी है।
हाईकोर्ट में है मामला
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना का कहना है कि गांवड़ी के साथ ही लोहियानगर में भी यही दिक्कत है। इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में रिट दायर की हुई है। उसमें कहा कि डंपिंग ग्राउंड के चलते कई किमी के क्षेत्र में पर्यावरण दूषित हो चुका है। इस पर दो जुलाई को सुनवाई होगी।