संवाद न्यूज एजेंसी
झिंझाना। ग्राम भड़ी मुस्तफाबाद (पुरानी भड़ी) में यमुना नदी की तेज रफ्तार ने एक बार फिर संकट खड़ा कर दिया है। पहाड़ों में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण यमुना उफान पर है और अब तक करीब 15 फुट तक कटान कर चुकी है। इससे यमुना किनारे बसे मकान और गांव खतरे की जद में आ गए हैं।
मौजूदा प्रधान नजाकत ने कटान की सूचना ड्रेनेज विभाग, एसडीएम ऊन और लेखपाल को दी थी। सूचना के बाद विभागीय कार्रवाई को ग्रामीणों ने महज औपचारिकता करार दिया है।
उनका कहना है कि मौके पर केवल लकड़ी के खूंटे गाड़कर उन पर लोहे के तार व झाड़ियां बांध दी गई हैं, जबकि असलियत में कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में इस क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा चौकी घोषित किया गया है, मगर जमीनी स्तर पर कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है।
कटान से घरों पर खतरा मंडरा रहा है : ग्रामीण इंशाद राणा ने बताया कि इस गांव को पुरानी भड़ी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1978 में आई भीषण बाढ़ के कारण यह गांव पूरी तरह उजड़ गया था। उस समय प्रशासन ने प्रभावित लोगों को बसाने के लिए भड़ी भरतपुरी गांव बसाया था, वहीं कुछ परिवार चौसाना में जाकर बस गए थे। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कुछ ग्रामीण फिर से पुरानी भड़ी लौट आए थे।
इस बाढ़ के कारण गांव तीन भागों में विभाजित हो गया था, पुरानी भड़ी, भड़ी भरतपुरी और चौसाना। अब एक बार फिर तेज कटान और यमुना की बढ़ती धारा ने ग्रामीणों को उसी वर्ष की तबाही की याद दिला रहा है।
यमुना किनारे पर प्रधान नजाकत, जहांगीर, जिशान, फरमान, जुल्फिकार, तारीफ, सदाकत, इकबाल, इकराम समेत दर्जनों ग्रामीणों के मकान हैं। कटान से इन घरों पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों में डर और दहशत का माहौल है।