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ग्रामीणों को बैंक जाने की जरूरत नहीं, ‘सखी’ घर पहुंचाएगी नकदी

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ग्रामीणों को बैंक जाने की जरूरत नहीं, ‘सखी’ घर पहुंचाएगी नकदी
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हस्तिनापुर। विकासखंड की 46 ग्राम पंचायतों में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार ने एक ग्राम पंचायत में एक बैंक सखी (बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट) की तैनाती की है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की इस योजना से महिलाओं को रोजगार मिलेगा और उनकी आय बढ़ेगी।
विकासखंड की 46 ग्राम पंचायतों में बैंक मित्र की तर्ज पर बीसी सखी कार्य करेंगी। ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण लेकर गांव में लोगों को नकदी निकासी और जमा करने की सुविधा दे सकेंगी। योजना से महिला सशक्तीकरण को बल मिलने के साथ ही गांव के लोगों को भी नकदी जमा करने और निकालने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर बैंक सखी योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना है। साथ ही ग्रामीण लोगों को बैंक के चक्कर काटने से भी राहत मिलेगी।
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खंड विकास अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पहले चरण का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। दूसरे चरण का प्रशिक्षण जल्द पूरा होते ही ग्राम पंचायत स्तर पर तैनाती दी जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत धन का आवंटन इन्हीं बीसी सखी के माध्यम से किया जाएगा।
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मानदेय के साथ मिलेगा कमीशन
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार प्रशिक्षण पास करने के बाद बैंक सखी को शासन स्तर से ही ईपोस मशीन दी जाएगी। प्रत्येक बीसी सखी को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही कमीशन भी दिया जाएगा।
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