125 दूधिया के साथ जुड़े हैं पशु पालक
दस गांव से करीब सवा सौ दूधिया सुबह-शाम ट्रेन पर दूध की केन लटकाकर दिल्ली और शाहदरा पहुंचते थे। इन दूधिया से सैकड़ों पशुपालक भी जुड़े हैं।
क्या कहते हैं दूधिया
दूधिया रोजूदीन का कहना है कि दिल्ली दूध की सप्लाई करने में परेशानी बढ़ी है। ट्रेन का संचालन जल्द से जल्द होना चाहिए। इससे आर्थिक राहत मिलेगी।
दूधिया मुकेश कुमार का कहना है कि ट्रेन का संचालन बंद होने के कारण शाहदरा में दूध की सप्लाई करने में मुश्किलें खड़ी हो रही है। निजी वाहन से खर्च बढ़ गया है।
आसमान छू रहे पशु आहार के दाम
दूध विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना काल में पशु आहार के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इससे पशुपालकों के सामने भी मुश्किल खड़ी हो गई है। कोरोना से पहले खल की बोरी साढ़े 18 सौ रुपये की थी, अब 21 सौ रुपये पर पहुंच गई है। चोकर पर भी करीब डेढ़ सौ रुपये बढ़ गए हैं।
इस तरह खरीदा और बेचा जा रहा दूध
पशुपालकों से दूध 38 से 40 रुपये प्रति किलो खरीदा जा रहा है। शाहदरा और दिल्ली में डेयरियों पर 50 से 55 रुपये किलो तक दूध बिक रहा है। कुछ एरिया में 60 रुपये किलो तक भी बिक जाता है।
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