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स्थायी व अस्थायी मंडी के बीच फंसी सब्जी आपूर्ति

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स्थायी व अस्थायी मंडी के बीच फंसी सब्जी आपूर्ति
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मेरठ। नवीन मंडी बंद होने के तीन दिन बाद भी प्रशासन जागृति विहार एक्सटेंशन में अस्थायी मंडी तैयार नहीं कर पाया है। ऐसे में दोनों मंडियों के बीच शहर की सब्जी आपूर्ति फंसती नजर आ रही है। वहीं नवीन सब्जी मंडी के व्यापारी जागृति विहार में दुकान चलाने से इनकार कर रहे हैं। व्यापारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सब्जी व्यापारियों ने फल मंडी के व्यापारियों की कोरोना जांच नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि सब्जी मंडी परिसर में फलों का कारोबार नहीं होने दिया जाएगा। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सब्जी मंडी व्यापारियों ने महीनेभर तक मंडी बंद रखने पर सहमति जता दी है।
नवीन मंडी में कोरोना संक्रमित मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सब्जी और फल की बिक्री 6,7 और 8 मई के लिए बंद करा दी थी। 9 मई से सब्जी मंडी को जागृति विहार एक्सटेंशन में तीन माह के लिए स्थाई रूप से संचालित करने का निर्णय लिया गया। सब्जी मंडी परिसर के कुछ हिस्से में फल मंडी के कुछ व्यापारियों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया था। शुक्रवार देर शाम तक नवीन सब्जी मंडी और जागृति विहार अस्थाई सब्जी मंडी पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया। सब्जी मंडी एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक प्रधान ने प्रशासन की योजना पर ही आपत्ति जताई है।
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उनका कहना है कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिसमें शहर की सब्जी आपूर्ति सुचारू चले। साथ ही व्यापारी व खरीदार सुरक्षित रहें। नवीन मंडी में फल, सब्जी और गल्ला मंडी के संचालन का अलग-अलग समय होना चाहिए। तीनों मंडी एक साथ खोले जाने से भीड़ बढ़ती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सब्जी मंडी के व्यापारी और ग्राहकों के कोरोना टेस्ट कराए, लेकिन जहां से संक्रमण की चेन आई उस फल मंडी के किसी भी व्यापारी का कोरोना टेस्ट नहीं कराया। उन्होंने कहा कि जागृति विहार जैसे असुरक्षित स्थान पर कोई व्यापारी, पल्लेदार और किसान नहीं जाएगा। इसके लिए चाहे मंडी एक महीने ही क्यों न बंद रखनी पड़े।
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अधिकतर सब्जी व्यापारी घरों में क्वारंटीन
नवीन सब्जी मंडी के करीब 30 फीसदी व्यापारियों ने अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह तक अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। बचे व्यापारियों में से 50 फीसदी ने कोरोना संक्रमण फैलने के बाद दुकानों पर ताले लगा दिए। अब जो 20 से 30 फीसदी दुकानदार मंडी पहुंच रहे थे, वह अब खुद को असुरक्षित बताते हुए मंडी में आने से मना कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में जागृति विहार एक्सटेंशन में सब्जी मंडी संचालित कराना जिला प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
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