वट सावित्री वत्र: पूजा करतीं महिलाएं
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हिंदू पंचांग के अनुसार प्रति माह अमावस्या दी है। इस दिन लोग पितरों की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं। वट सावित्री व्रत के पालन में तो परंपराएं प्रचलित हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार श्रेष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत का अधिक महत्व माना गया है।
इस दिन सुहागिनें बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं। पति की लंबी आयु की कामना कर की जाती है। वट सावित्री व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। मंदिरों में महिलाएं वट वृक्ष के नीचे कथा पढ़ती हैं और पूजा-अर्चना करती हैं।
आज ही के दिन देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की ओर यमराज ने सावित्री को चिरसुबह का वरदान दिया। तभी से महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को करती हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलोजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि हिंदू शास्त्र के अनुसार वट वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाव में शिव का वास माना गया है।
मेहंदी की दुकानों पर लगी भीड़
शहर के बाजारों में वट सावित्री व्रत के मद्देनजर बाजार खुलते ही मेहंदी की दुकानों पर भीड़ लग गई। महिलाओं ने सोलह श्रंगार का सामान खरीदा। आबूलेन और सदर में विभिन्न स्थानों पर महिलाओं ने मेहंदी लगवाईं।