सैन्य कबाड़ को नष्ट करने के लिए फैक्ट्री मालिकान ने इन निष्प्रोज्य बम व मिसाइलों को यहां-वहां नाले, रजवाहे, नदी व नहरों में डालना शुरू कर दिया। कई महीने तक निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलें लावारिस यहां से मिलनी शुरू हो गई, जो अधिकांशत: मंसूरपुर थाना क्षेत्र में आते थे।
ऐसे में तत्कालीन अफसरों ने इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को जब्त करते हुए पहले तो दूरदराज के स्थानों पर जमीन में दफन करना शुरू किया, लेकिन बाद में वहां भी ये कबाड़ जमीन से बाहर आना शुरू हो गया, जिसके चलते पुलिस-प्रशासन ने इन्हें सुरक्षित रखने के नाम पर धीरे-धीरे मंसूरपुर थाने के परिसर में ही जमीन में दफन करना शुरू कर दिया। बड़े पैमाने पर लावारिस मिलने वाले इन निष्प्रयोज्य बम व मिसाइलों को मंसूरपुर थाने की जमीन में दफन किया गया था।
हाइवे के मंसूरपुर थाना परिसर की जमीन में कई जगह यह बमों का जखीरा दफन है, जिसके चलते शुरूआत में तो पुलिसकर्मी इस थाने में तैनाती लेने से भी बचते नजर आते थे। पुराने पुलिसकर्मियों की यहां से रवानगी होती गई और नए रंगरूट व अफसर आते रहे, जिसके बाद थाने की इस बारूदी विरासत पर समय की गर्द चढ़ती चली गई और अब शायद ही किसी को मंसूरपुर थाने की इस सच्चाई का पता हो।
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