इन्हीं चर्चाओं के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने योगेश वर्मा और सुनीता वर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस निष्कासन के बाद नगर निगम के कई बसपा पार्षदों ने योगेश वर्मा और सुनीता वर्मा का निलंबन वापस लेने का दबाव बनाया। लेकिन जब बात नहीं बनी तो पार्टी छोड़ कर योगेश वर्मा के साथ आधा दर्जन से ज्यादा पार्षदों के होने का दावा किया गया।
बसपा में मची इस हलचल की खबर पार्टी हाईकमान तक पहुंची। जिस पर बसपा सुप्रीमो ने दलित नेता के निष्कासन के बाद दूसरे दलित नेता को मेरठ में लगाने की रणनीति अपनाते हुए एमएलसी अतर सिंह राव को फिर से मेरठ में सक्रिय किया है। अतर सिंह को मध्य प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। लेकिन साथ ही अब उन्हें मेरठ और बुलंदशहर का भी इंचार्ज बनाया गया है।
बसपा सूत्रों के अनुसार योगेश वर्मा ने लोकसभा चुनाव बुलंदशहर से लड़ा था, ऐसे में योगेश वर्मा कहीं बुलंदशहर में भी पार्टी विरोधी गतिविधियां संचालित न कर दें तो मेरठ के साथ बुलंदशहर में भी अतर सिंह राव को लगाया गया है।
योगेश कर रहे थे अनुशासनहीनता: राव
अतर सिंह राव ने मंगलवार को पार्टी कार्यालय में निगम पार्षदों के साथ बैठक की। जिलाध्यक्ष सुभाष प्रधान ने बैठक के बाद दावा किया कि इस बैठक में पार्षद मनोज, नरेश जाटव, राजकुमार, सुमित बौद्घ, धर्मवीर, भोपाल चांदना, परमानंद, जयवीर सिंह, रमेश पाल, मौ. इदरीस, हाजी शौकत, मौ. कासिम, सलीम मलिक, दिलशाद अली, सिराजुद्दीन, तैय्यब, नवाब, सईद आदि मौजूद रहे। बैठक में सभी ने बसपा के साथ होने का दावा किया। वहीं चार पार्षद व्यक्तिगत कारणों से बैठक में नहीं आ सके। लेकिन उन्होंने भी पार्टी में पूरी निष्ठा जताई है।
वहीं, राव ने कहा कि योगेश वर्मा काफी समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। पार्टी ने उन्हें इतना सम्मान दिया। लेकिन वह कभी भाजपा तो अब सपा में जाने के लिए गुपचुप तरीके से लगे थे। अब वह बसपा पार्षदों को लेकर भी दुष्प्रचार कर रहे हैं। जिन पार्षदों के इस्तीफे उन्होंने प्रस्तुत किए हैं, उनमें कई ने बताया कि उनके लेटर हैड महापौर के पास थे, जिसका दुरुपयोग करते हुए उनके त्यागपत्र देने की बात कही जा रही है।