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उपद्रव में आरएसएस के लोग शामिल: सुनीता वर्मा 

Thu, 05 Apr 2018 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भारत बंद के आह्वान के दौरान हुए बवाल के मुख्य आरोपी पूर्व बसपा विधायक योगेश वर्मा की पत्नी महापौर सुनीता वर्मा ने प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि इस उपद्रव में आरएसएस के लोग शामिल थे। बुधवार को आयोजित वार्ता के दौरान महापौर ने योगेश वर्मा द्वारा जेल से भेजे गए पत्र को भी दिखाया। जिसमें योगेश वर्मा ने मेरठ प्रशासन पर षड्यंत्र के तहत फंसाने का आरोप लगाया है। कहा है कि बसपा की ओर से इस बंद में जाने का कोई निर्देश नहीं था। वह शांति के साथ अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। आंबेडकर की प्रतिमा पर उन्होंने 15 मिनट में धरना प्रदर्शन समाप्त कराया। अधिकारियों के कहने पर जिले में जगह-जगह हो रहे प्रदर्शन को भी उन्होंने रोका। दावा किया कि डीएम अनिल ढींगरा और एसएसपी मंजिल सैनी ने बसपा के जिलाध्यक्ष मोहित जाटव को फोन कर हमें बुलाकर शांति व्यवस्था कायम कराने की बात कही थी। अधिकारियों के कहने पर वह कंकरखेड़ा गए। लेकिन भाजपा नेताओं के इशारे पर इस प्रकरण का उन्हें मास्टर माइंड बनाया गया जबकि वह निर्दोष हैं। 
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पत्र में पूर्व विधायक ने लोगों से शांति की अपील करते हुए कहा कि उनका मकसद है कि शहर में अमन कायम रहे। अगर सत्ता के दबाव में अधिकारी किसी नेता या सामाजिक कार्यकर्ता को इस तरह फंसा देंगे तो पुलिस की कोई भी मदद नहीं करेगा। उन्होंने 2019 के चुनाव में भाजपा को इसका खामियाजा भुगतने की बात भी कही। 
वहीं, महापौर का दावा है कि दलित इस तरह का उपद्रव नहीं कर सकता है। आरएसएस के लोगों ने नकाब पहनकर इसे अंजाम दिया। वह सत्ता के दबाव में न आकर मजबूती के साथ सत्ताधारी नेताओं से लड़ाई लड़ेंगी। नगर निगम को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ चलाया जाता रहेगा। इस दौरान तुषार वर्मा, दीपक वर्मा, बिट्टू आदि मौजूद रहे।
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महापौर बोलीं, मेरी जान को खतरा
मेरठ। महापौर सुनीता वर्मा का आरोप है कि सरकार के इशारे पर जिला प्रशासन ने मेरे पति को फर्जी तरीके से फंसाकर जेल भेज दिया। मंगलवार को पति से मिलने जेल गयी तो अधिकारियों ने महापौर के प्रोटोकॉल का अपमान किया। उन्हें तीन घंटे तक जेल के बाहर धूप में खड़ा रखा। अपमानित भी किया। जिला प्रशासन ने गनर भी वापस ले लिया। जिसके बाद से वह खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। महापौर ने कमिश्नर, एससी-एसटी आयोग, मानवाधिकार आयोग को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि गनर हटाने के पीछे कहीं न कहीं उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। महापौर का कहना है कि उनकी जान को खतरा है। उन्हें सुरक्षा दी जाए। जिला प्रशासन को निर्देश दिए जाएं कि महापौर के प्रोटोकॉल का सम्मान किया जाए। 
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