रेड लाइट एरिया में छापा
- फोटो : अमर उजाला
एक सहेली के साथ घूमने निकली लड़की तारापुरा बार्डर के पास राह भटक गई। यहां दलालों ने उसे अपने चंगुल में फंसा लिया और मुंबई बेच दिया। मुंबई से दिल्ली और फिर मेरठ के रेड लाइट एरिया के नर्क में पिछले एक साल से युवती घुट रही थी। 'संकल्प संस्था' और पुलिस की मदद से युवती को यहां से तो निकाल लिया गया लेकिन कानून से कैसे बचा जा सकता था। यहां से वह सीधा सलाखाें के पीछे पहुंच गई।
मिथ्या ग्राहक को भेदिए के रूप में कोठे पर भेजा गया
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक के मुताबिक संकल्प संस्था की अध्यक्ष अतुल शर्मा की सूचना पर बांग्लादेशी निवासी इस युवती की निगरानी शुरू की गई थी। बांग्लादेश के बघरा जिले के एक गांव की निवासी इस युवती के कबाड़ी बाजार स्थित गंगा थापा के कोठे पर होने की सूचना थी। जिस पर पिछले दस दिनों से एक मिथ्या ग्राहक को भेदिए के रूप में कोठे पर भेजा जाता रहा। जिसके बाद गुरूवार को इस युवती को बाजार में घुमाने ले जाने के बहाने निकालकर एंटी हृयूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) थाना लेकर पहुंचा।
जानकारी लेते पुलिस अधिकारी
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सीओ एलआईयू रतन नौलखा के अनुसार जांच में सामने आया कि बार्डर पर युवती रास्ता भटक गई थी। कोठा संचालिका ने दलाल के माध्यम से उसे खरीदा था। आतंकी गतिविधि जैसी कोई बात सामने नहीं आयी है। पूरे मामले की रिपोर्ट शासन और संबंधित दूतावास को भेज दी जाएगी।
पता नहीं कब घर मिलेगा
युवती ने पुलिस अफसरों को बताया कि अब पता नहीं उसके कभी अपना घर भी नसीब होगा या नहीं। हालांकि, युवती का यह कथन गले नहीं उतर रहा कि उसे यही लग रहा था कि वह बांग्लादेश के ही किसी कोठे पर बंधक बनाकर रखी गई है और वहां से किसी तरह निकलकर घर चली जाएगी। फिलहाल पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है।
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