मंदिर के डिजाइन को स्वीकृति देने वाले पूज्य 108 स्वामी कनक प्रभानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि मंदिर में नागर शैली की तरह पीठ, मंडप, शिखर, आमलक, कलश और ध्वज को स्थान दिया गया है। ध्वज के साथ त्रिशूल, डमरू, ऊं और नाग भी विराजमान होंगे। प्रदक्षिणा पथ को ढका गया है। गंगा और यमुना को स्थान दिया जाएगा। मंदिर के कपाट पर 12 ज्योर्तिलिंग के दर्शन होंगे। 22 जनवरी को शिव परिवार की स्थापना होगी।
तीन शैली में से एक है नागर शैली
नागर शैली उत्तर भारत की तीन शैली में से एक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, नागर शैली में बनाए गए मंदिर की पहचान का आधार सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है। पूज्य 108 स्वामी कनक प्रभानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है। मंदिर में दो भवन होते हैं। इसमें एक गर्भगृह और दूसरा मंडप। गर्भगृह ऊंचा होता है और मंडप छोटा होता है। गर्भगृह घंटाकार होने के कारण मंदिर की ऊंचाई काफी बढ़ जाती है।
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