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धर्मेंद्र प्रधान बोले: भारत की आत्मा खेतों में, किसान का सम्मान वहीं हो, यूपी में एग्रीटेक हब का शुभारंभ

Tue, 08 Jul 2025 05:03 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की आत्मा खेतों में है और किसानों का असली सम्मान तकनीक के साथ खेतों से ही होगा। एआई आधारित एग्रीटेक हब का लोकार्पण करते हुए उन्होंने किसानों की आमदनी दोगुनी करने के संकल्प को दोहराया।

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कार्यक्रम में पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान व जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गांधी भवन में आयोजित "उत्तर प्रदेश एग्रीटेक इनोवेशन हब" के लोकार्पण कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किसानों को देश की आत्मा बताया। उन्होंने कहा, “भारत की आत्मा खेतों में है, और किसान का असली सम्मान खेत से ही होगा।”

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कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए एआई, डिजिटल सर्वे, स्मार्ट फार्मिंग जैसे तकनीकी माध्यम अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने जहां किसानों से एथनॉल खरीदा, वहीं यूपीए ने किसानों से धोखा किया।

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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा -2014 में 250 करोड़ की एथनॉल खरीद होती थी, अब 40,000 करोड़ की होती है। जल्दी ही ये आंकड़ा 1 लाख करोड़ तक पहुंचेगा। गन्ना, आलू, गेहूं और पराली से भी अब एथनॉल बनाया जा रहा है। 

उन्होंने बताया कि अब आधुनिक डीजे की तरह किसानों के खेतों में जानकारी देने वाले वैन जाएंगे। किसानों को मोबाइल के ज़रिए मौसम, मिट्टी, उत्पादन, बीमारी और बाजार की पूरी जानकारी मिलेगी।

 
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कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि आईआईटी रोपड़ अब लैब से खेतों तक पहुंच गया है। किसान अब सिर्फ उत्पादक नहीं, उद्यमी भी बन सकते हैं। कृषि में मेरठ और वेस्ट यूपी की क्रांति की जरुरत है। 

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि  अब खेतों का डिजिटल सर्वे हो रहा है और किसानों को जलवायु और वर्षा की सटीक जानकारी दी जाएगी। 

कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का सपना तभी पूरा होगा जब किसान कम लागत में ज़्यादा उत्पादन करे। आज जरूरत है कि किसान डिजिटल तकनीक को अपनाएं।

कार्यक्रम में आईआईटी रोपड़, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी, किसान प्रतिनिधि और छात्र मौजूद रहे।
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