धर्मेंद्र प्रधान ने कहा -2014 में 250 करोड़ की एथनॉल खरीद होती थी, अब 40,000 करोड़ की होती है। जल्दी ही ये आंकड़ा 1 लाख करोड़ तक पहुंचेगा। गन्ना, आलू, गेहूं और पराली से भी अब एथनॉल बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब आधुनिक डीजे की तरह किसानों के खेतों में जानकारी देने वाले वैन जाएंगे। किसानों को मोबाइल के ज़रिए मौसम, मिट्टी, उत्पादन, बीमारी और बाजार की पूरी जानकारी मिलेगी।
कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि आईआईटी रोपड़ अब लैब से खेतों तक पहुंच गया है। किसान अब सिर्फ उत्पादक नहीं, उद्यमी भी बन सकते हैं। कृषि में मेरठ और वेस्ट यूपी की क्रांति की जरुरत है।
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि अब खेतों का डिजिटल सर्वे हो रहा है और किसानों को जलवायु और वर्षा की सटीक जानकारी दी जाएगी।
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि चौधरी चरण सिंह का सपना तभी पूरा होगा जब किसान कम लागत में ज़्यादा उत्पादन करे। आज जरूरत है कि किसान डिजिटल तकनीक को अपनाएं।
कार्यक्रम में आईआईटी रोपड़, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी, किसान प्रतिनिधि और छात्र मौजूद रहे।