पुलिस ने जिन अपराधियों का सम्मान किया है, उनसे पीड़ित लोगों में खौफ है। सम्मान हुए अपराधियों के फोटो और वीडियो वायरल हुई तो लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए है। लोगों का कहना है कि जिन पेशेवर अपराधियों की दहशत इलाके में है, उनको पुलिस भला कैसे सम्मान दे सकती है। हालांकि पुलिस का दावा है कि इन अपराधियों को विरोध करने वाले लोग नहीं मिले है।
ये अपराधी हुए सम्मानित
इंस्पेक्टर लिसाड़ी गेट मोहम्मद असलम के अनुसार आकिल, रहीस राणा, सरद मोहन, रवि, सलीम, अब्दुल वाहब, मोहम्मद हनीफ, शेरद्दीन, इमरान, नौशाद, उमर दराज, शकील पिस्टल, अजय सिंघल, वजीर, हेमंत हैं। ये सभी लिसाड़ी गेट और कोतवाली के रहने वाले हैं। इन सभी को थाने में सम्मानित किया गया है।
सम्मान करना गलत
पुलिस द्वारा पेशेवर अपराधियों का सम्मान करना गलत है। लगातार उपस्थित और निगरानी करने की जरूरत है। पेशेवर अपराधी वर्तमान में जो काम कर रहे है, उनको लिखा पढ़ी में रिपोर्ट बनाकर रखे। -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
तत्कालीन कप्तानों के अभियान हवा में उड़ाए
जब पुलिस अफसरों ने थाने में अपराधियों को माला पहनाकर सम्मानित किया तो पूर्व में जिले में चले कई बड़े अभियानों को पुलिस ने हवा में उड़ा दिया। तत्कालीन एसएसपी दिनेश चंद्र दूबे ने अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया। पेशेवर अपराधियों के पोस्टर चौराहे पर लगवाए। तत्कालीन एसएसपी जेे. रविंदर गौड ने हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन कर घर पर भोपू अभियान शुरू कराया था। इस अभियान से अपराधी घर छोड़कर फरार होने लगे और पहली बार पड़ोसियों को सार्वजनिक तौर पर पता चला कि उनका पड़ोसी अपराधी है। एसएसपी रह चुके के. सत्यनारायणा ने भी चेन स्नैचर, पर्स लुटेरों, डकैती के आरोपी, हिस्ट्रीशीटरों के फोटो चौराहों पर लगवा दिए थे।
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