यह कहते हैं एक्सपर्ट
पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि वह पिछले करीब 20 साल से पुलिस में घोड़ों से शहर और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त कर चुके हैं। चाहे गणतंत्र दिवस की परेड हो या फिर पुलिस के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन। उनमें घुड़सवार पुलिस की शान अलग ही होती है। प्रत्येक घोड़े को औसतन जितनी प्रैक्टिस कराई जाएगी उसकी चाल उतनी ही खुलेगी। यदि बिना चले घोड़े के पैर के खुर बढ़ जाते हैं तो फिर उसकी चलने की क्षमता भी कम होने लगती है।
प्रत्येक दिन में औसतन चार से छह किमी तक जरूर चलाया जाना चाहिए। घोड़े को खुराक जिस नियम से दी जाती है उसी के अनुसार घोड़े का पसीना निकलना भी जरूरी है। पूर्व में पुलिस लाइन से हरिद्वार और इलाहाबाद कुंभ मेले के अलावा गढ़ गंगा मेले में ड्यूटी के लिए घोड़े भेजे जाते थे, लेकिन घुड़सवारों की कमी से मुसीबत बन गई है।
काठियावाड़ी नस्ल के हैं घोड़े
एसपी लाइन संजीव बाजपेयी का कहना है कि पुलिस लाइन में जो घोड़े हैं वह काठियावाड़ी नस्ल के हैं। घोड़ों की यह नस्ल सबसे अच्छी मानी जाती है। इस नस्ल के घोड़ों की ऊंचाई करीब डेढ़ मीटर से लेकर 160 सेंटीमीटर तक होती है।
खुराक :एक घोड़े को प्रत्येक दिन में एक किग्रा चना, दो किग्रा जौ, एक किग्रा गेहूं का चौकर, सीजन की घास दी जाती है। 18 किग्रा सूखी घास या फिर 25 किग्रा हरी घास दी जाती है।
घोड़ों की संख्या की तुलना में घुड़सवारों की कमी है। इस मामले में उच्च अधिकारियों को अवगत कराते हुए शासन को भी पत्र लिखा गया है। घोड़ों की देखरेख में कोई कमी नहीं की जा रही है। - संजीव बाजपेयी, एसपी लाइन/ एसपी ट्रैफिक
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