फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: अफसरों ने पीसीडीएफ को लगाया 69 करोड़ का चूना, ऐसे खुला पूरा खेल

Sat, 01 Sep 2018 10:19 AM IST
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
milk collection unit
विज्ञापन

प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) में  कमीशनखोरी का ऐसा खेल चला कि करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया गया। प्रदेश में 6835 समितियों के सापेक्ष अधिकारियों ने 12,859 डाटा प्रोसेसर मिल्क कलेक्शन यूनिट (डीपीएमसीयू) खरीद लीं। जबकि एक समिति में एक ही यूनिट काफी है। ऐसे में अब ये दोगुनी यूनिट क्यों खरीदी गईं, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जानें कैसे किया गया ये बड़ा घपला :-

विज्ञापन

 

किस काम आती है डीपीएमसीयू

इस खेल का दूसरा पहलू ये भी है कि दोगुनी संख्या में खरीदी गई इन यूनिट्स का प्रदेश की अधिकांश समितियों पर उपयोग भी नहीं हो रहा है। इस पूरे मामले में करीब 69 करोड़ का चूना लगा दिया गया। बताया तो ये भी जा रहा है कि जितनी कीमत में एक यूनिट की खरीद की गई है, वह वास्तव उससे आधी कीमत की है। इसके अलावा बल्क मिल्क कूलर (बीएमसी) खरीद में भी पीसीडीएफ द्वारा बड़ा घपला किया गया है। 

ये यूनिट दूध की सैंपलिंग के काम आती है, इससे दूध में पानी की मिलावट, फैट, वेट आदि की जांच की जाती है। जीपीआएस लगा होने के कारण जांच रिपोर्ट सीधे ही दुग्ध संघ और लखनऊ मुख्यालय को जायेगी। ऐसे में दूध की चोरी और दूध की मिलावट दोनों को रोका जा सकेगा।

प्रदेश में दुग्ध समितियों को दोगुना करने का लक्ष्य दिया है। लेकिन अभी तक किसी भी दुग्ध संघ ने इस दिशा में संतोषजनक काम नहीं किया है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीएमसीयू खरीदे गए हैं। - डॉ. सुधीर एम बोबड़े, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ।

ऐसे खुला पूरा खेल

पीसीडीएफ में कार्यरत अनुसूचित जाति के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों ने अतिरिक्त वार्षिक वेतन वृद्धि और प्रोन्नति न होने पर राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग में शिकायत की थी। इस शिकायत में इन अधिकारियों ने कहा था कि एक तरफ जहां विभाग के वरिष्ठ अधिकारी धन की कमी की बात कहकर अतिरिक्त वेतन वृद्धि का मामला टाल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ खुलकर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।  इस शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग द्वारा पीसीडीएफ के प्रबंध निदेश से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी। जिसमें उन्होंने बताया कि पीसीडीएफ की पूरे प्रदेश में 6835 दुग्ध समितियां हैं।

इन समितियों के लिए डाटा प्रोसेसर मिल्क कलेक्शन यूनिट की 15 फरवरी 2018 को खरीद की गई है। एक यूनिट की कीमत 1 लाख14 हजार रुपये है और प्रदेश में कुल 12,859 यूनिट खरीदी गई हैं। इसके अलावा प्रदेश में कुल 750 नये बल्क मिल्क कूलर खरीदे गये हैं। इनमें एक हजार लीटर की क्षमता वाले बीएमसी 325 खरीदे गए हैं, जिनकी कीमत प्रति बीएमसी 10 लाख 39 हजार 183 रुपये है। जबकि दो हजार लीटर क्षमता वाले 350 बीएमसी खरीदे गये हैं, जिनकी कीमत प्रति बीएमसी 12 लाख 22 हजार188 रुपये है।
 
इसके अलावा तीन हजार लीटर क्षमता वाले 75 बीएमसी खरीदे गये हैं, जिनकी प्रति बीएमसी कीमत 15 लाख 2 हजार के आसपास है। दुग्ध संघों में इस समय कुल 520 बीएमसी लगे हैं, जिनमें 249 बीएमसी ही चालू हैं।  
विज्ञापन

पूरे मामले पर ये उठे सवाल 

डीपीएमसीयू खरीद पर बड़ा सवाल यह उठा कि जब प्रदेश में समितियां ही 6835 हैं तो डीपीएमसीयू 12859 क्याें खरीदे गए। आधे से ज्यादा समितियों में पहले से डीपीएमसीयू मौजूद हैं, जिनका आज तक कोई उपयोग नहीं हुआ। डीपीएमसीयू खरीद में पीसीडीएफ ने 68 करोड़ 67 लाख 36 हजार रुपये ज्यादा खर्च कर डाले। विभागीय सूत्रों की मानेें तो जिस डीपीएमसीयू को 1.14 लाख रुपये की खरीद करना बताया है, उसकी वास्तविक कीमत इसकी आधी है। ऐसे में एक बड़े घोटाले की नींव भी इस डीपीएमसीयू खरीद में साफ नजर आ रही है।

मेरठ जनपद में करीब 650 समिति हैं, लेकिन यहां पर भी विभाग द्वारा एक हजार डीपीएमसीयू भेज दी गई हैं, जो गोदाम में रखी जंग खा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ बीएमसी खरीद पर भी पहला सवाल यह उठ रहा है कि जब पहले से आधे बीएमसी दूध कम आने के कारण बंद हैं, तो उन्हें चालू करने के बजाए नई खरीद क्यों की गई।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें