पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची जारी होने के बाद आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला शुरू हो गया है। मेरठ में गुरुवार को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में पहले दिन 21 आपत्तियां पहुंचीं। इसमें सबसे अधिक 18 आपत्तियां प्रधान पदों पर आरक्षण को लेकर हैं, जबकि तीन आपत्तियां जिला पंचायत सदस्य और एक क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए है।
आरक्षण पर आपत्तियां आठ मार्च तक दर्ज कराई जा सकती हैं। आपत्तियों को जांच के बाद अंतिम सूची का प्रकाशन 15 मार्च को किया जाएगा। गुरुवार को अलग-अलग गांवों से विकास भवन पहुंचे दावेदारों और आपत्तिकर्ताओं ने आरक्षण सूची को गलत बताया। कहा, जहां अनुसूचित जाति की एक भी वोट नहीं है, उस गांव को सामान्य में कर दिया गया है। वहीं, जहां पिछड़ा वर्ग नहीं है, उसे पिछड़ा वर्ग में आरक्षित कर दिया गया है। कुछ ने आरक्षण में भाजपा की मिलीभगत का आरोप लगाया। आपत्तियां लिखित में ली गई हैं।
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ये हैं कुछ आपत्तियां
- जानी ब्लॉक के सालेहनगर ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति में आरक्षित हुई है। ग्राम पंचायत में अनुसूचित जाति के 50 वोट (2.14 प्रतिशत) हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग के 1,541 और सामान्य के 123 वोट हैं। ग्राम पंचायत को सामान्य और अनुसूचित जाति में आरक्षित करने की मांग की गई है।
- जानी ब्लॉक के कुराली गांव में ब्लॉक प्रमुख सदस्य के वार्ड 9 से 12 तक अनुसूचित जाति में आरक्षित हुए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार इन वार्डों में अनुसूचित जाति का एक भी परिवार नहीं है। इन वार्डों को सामान्य जाति में करने की मांग की गई है।
- खरखौदा ब्लॉक के गांव साफियाबाद लौटी में वार्ड 48 में अनुसूचित जाति का एक भी मतदाता नहीं है। वार्ड 49 में दलित समाज, अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं। बावजूद इसके वार्ड 48 को अनुसूचित और वार्ड 49 को सामान्य में आरक्षित किया गया है। वार्डों के आरक्षण को आपस में बदलने की मांग की गई है।
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